शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता के ‘कंक्रीट के जंगल’ में बदलने पर चिंता जतायी
शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता के ‘कंक्रीट के जंगल’ में बदलने पर चिंता जतायी
कोलकाता, पांच जून (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कोलकाता और उससे सटे शहरी इलाकों के ‘कंक्रीट के जंगल’ में बदलने पर चिंता व्यक्त की और आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान निर्माण परियोजनाओं में हरित क्षेत्रों को संरक्षित रखने संबंधी अनिवार्य नियमों की अक्सर अनदेखी की गई।
साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे उल्लंघनों की पर्यावरणीय कीमत आने वाली पीढ़ियों को चुकानी पड़ेगी।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी वनीकरण अभियान ‘एक पेड़ मां के नाम’ की शुरुआत करते हुए अधिकारी ने 31 मार्च 2027 तक राज्यभर में 1.10 करोड़ पेड़ लगाने और उनका संरक्षण करने का लक्ष्य घोषित किया।
बिधाननगर स्थित नलबन में आयोजित राज्य स्तरीय विश्व पर्यावरण दिवस समारोह में उन्होंने कहा, ‘‘वृहद कोलकाता क्षेत्र धीरे-धीरे कंक्रीट के जंगल में बदलता जा रहा है। शहर का विस्तार स्वाभाविक है, लेकिन पर्यावरणीय चिंताओं को अक्सर नजरअंदाज किया जा रहा है। हमने बड़े पैमाने पर कंक्रीट का विस्तार किया है और भविष्य में इस अन्याय की कीमत चुकानी पड़ेगी। नयी सरकार इसे रोकना चाहती है और हम इस मामले में अधिक सतर्क रहेंगे।’’
राज्य पर्यावरण विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में वृक्षारोपण अभियान की औपचारिक शुरुआत की गयी, जिसका समन्वय वन विभाग करेगा।
अधिकारी ने कहा कि मौजूदा भवन निर्माण नियमों के अनुसार किसी भी निर्माण परियोजना के कुल क्षेत्रफल का कम से कम एक-तिहाई हिस्सा हरित क्षेत्र के रूप में रखा जाना चाहिए, जिसमें वृक्षारोपण, उद्यान या खुले हरित क्षेत्र शामिल हों।
उन्होंने कहा, ‘‘भवन निर्माण योजनाओं को मंजूरी देने वाले अधिकारी नियमों से परिचित हैं। इसके बावजूद कई मामलों में पर्याप्त हरित क्षेत्र नहीं रखे जा रहे हैं। इससे तापमान बढ़ता है, वायु प्रदूषण में वृद्धि होती है और शहरी क्षेत्रों की प्राकृतिक जल धारण क्षमता घटती है।’’
उत्तर बंगाल के कई हिस्सों में वन भूमि कम होने पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रवृत्ति को रोकना जरूरी है, अन्यथा इससे पारिस्थितिकी संतुलन प्रभावित होगा।
मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि अनियंत्रित शहरीकरण और हरित क्षेत्रों में लगातार कमी से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है तथा शहरवासियों के जीवन की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
इस कार्यक्रम की शुरुआत नलबन जलाशय के किनारे वृक्षारोपण से हुई जहां मुख्यमंत्री ने एक स्वदेशी पौधा लगाकर अभियान की प्रतीकात्मक शुरुआत की।
कार्यक्रम में मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के राज्य सलाहकार तथा पर्यावरण, वन, स्वास्थ्य और मत्स्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
भाषा गोला नरेश
नरेश

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