तमिलनाडु के मंत्री ने कावेरी मुद्दे पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग खारिज की

तमिलनाडु के मंत्री ने कावेरी मुद्दे पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग खारिज की

तमिलनाडु के मंत्री ने कावेरी मुद्दे पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग खारिज की
Modified Date: August 2, 2026 / 03:34 pm IST
Published Date: August 2, 2026 3:34 pm IST

चेन्नई, दो अगस्त (भाषा) तमिलनाडु के मंत्री सी टी आर निर्मल कुमार ने कर्नाटक के साथ जारी कावेरी जल विवाद पर चर्चा के लिए राज्य के विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा की गयी सर्वदलीय बैठक की मांग रविवार को खारिज कर दी।

कुमार ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों के सहयोग एवं सहभागिता से पहले ही विधानसभा से सर्वसम्मति से एक विस्तृत प्रस्ताव पारित किया जा चुका है।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक), ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक), पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) और विदुथलाई चिरुथुगल काची (वीसीके) ने सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।

मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार कावेरी जल विवाद में तमिलनाडु के हितों को कमजोर करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘हमारी विधानसभा में सभी राजनीतिक दलों के समर्थन और भागीदारी से सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया। सभी दलों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव का समर्थन किया।’’

कुमार ने कहा, ‘‘उस प्रस्ताव से जुड़ी हर बात पर वहीं चर्चा हुई थी। अगर कोई विरोध जताना होता, तो उसे तभी उठाया जा सकता था। उन्होंने सब कुछ सुनने के बाद ही तो समर्थन किया था, किया था न? क्या सभी को बोलने का बराबर मौका नहीं दिया गया था? सभी ने अपनी बात रखी थी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘तो फिर, सिर्फ चार दिन पहले, उसने (अन्नाद्रमुक) उसी प्रस्ताव को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका क्यों दायर की, जिसका उन्होंने समर्थन किया था? जैसे ही उसने उच्च न्यायालय में मामला दायर किया, उसके दो दिन बाद द्रमुक ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर दी। आखिर इस सब से नुकसान किसका होता है? तमिलनाडु की जनता का। मुख्यमंत्री के लिए मुश्किलें खड़ी करने की आड़ में, वे जनता के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे हालात में आप हमसे यह उम्मीद कैसे कर सकते हैं कि हम इन्हीं लोगों को एक सर्वदलीय बैठक में बुलाएं?’’

कुमार ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में द्रमुक की ओर से ‘‘जल्दबाजी’’ में दायर की गयी याचिका से बेवजह भ्रम पैदा हुआ है।

मंत्री ने कहा, ‘‘कल सुबह विभिन्न हितधारकों से विचार-विमर्श करने के बाद मुख्यमंत्री ने फैसला किया कि इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की जानी चाहिए। दोपहर तक उच्चतम न्यायालय में हमारे वकील उमापति ने सभी चर्चाएं पूरी होने के बाद याचिका दायर करने की रणनीति की घोषणा की और प्रक्रिया शुरू कर दी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसी दौरान द्रमुक ने शाम पांच बजे के बाद जल्दबाजी में अपनी याचिका दाखिल कर दी। एक ही राज्य की ओर से एक ही मुद्दे पर कई याचिकाएं दायर होने से भ्रम की स्थिति पैदा होती है। पिछले पांच वर्षों में द्रमुक ने क्या किया? क्या उसने इससे पहले इस मामले में एक भी याचिका दायर की थी?’’

मंत्री ने कहा, ‘‘कर्नाटक में सभी एक ही रुख पर एकजुट हैं। वे हमें पानी नहीं छोड़ने के अपने फैसले पर अड़े हुए हैं और इस मुद्दे पर वहां किसी के दो मत नहीं हैं। यहां राजनीतिक दल अपनाई जाने वाली रणनीति पर एकमत नहीं हैं।’’

द्रमुक और डी. के. शिवकुमार के बीच करीबी और सौहार्दपूर्ण संबंध होने का दावा करते हुए मंत्री ने कहा, ‘‘दोनों के राजनीतिक रुख काफी हद तक एक-दूसरे से मेल खाते हैं।’’

मंत्री ने कथित राजनीतिक खरीद-फरोख्त को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘द्रमुक के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त की कथित साजिश के लिए बेंगलुरु को वित्तीय सुरक्षित ठिकाने के रूप में इस्तेमाल किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त से जुड़े मामले में जब्त की गई अधिकांश धनराशि बेंगलुरु में जब्त हुई थी और धन का बड़ा हिस्सा भी वहीं से था।’’

भाषा राजकुमार अमित

अमित


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