वन अधिकार कानून के कार्यान्वयन में आरएसएस की भूमिका ‘संस्थागत’ बनाने के लिए कार्यबल गठित : कांग्रेस

वन अधिकार कानून के कार्यान्वयन में आरएसएस की भूमिका ‘संस्थागत’ बनाने के लिए कार्यबल गठित : कांग्रेस

वन अधिकार कानून के कार्यान्वयन में आरएसएस की भूमिका ‘संस्थागत’ बनाने के लिए कार्यबल गठित : कांग्रेस
Modified Date: June 2, 2026 / 05:31 pm IST
Published Date: June 2, 2026 5:31 pm IST

नयी दिल्ली, दो जून (भाषा) कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकारों ने पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (पेसा), 1996 और वन अधिकार कानून, 2006 के कार्यान्वयन में आरएसएस की भूमिका को ‘‘संस्थागत’’ बनाने के लिए कार्यबलों का गठन किया है।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि ओडिशा जल्द ही इस तरह का कार्यबल का गठन करने वाला तीसरा राज्य होगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि पेसा और वन अधिकार अधिनियम के मूल चरित्र को नष्ट किया जा रहा है।

रमेश ने एक्स पर कहा, ‘‘मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकारों ने पेसा, 1996 और वन अधिकार अधिनियम, 2006 के कार्यान्वयन में आरएसएस की भूमिका को संस्थागत बनाने के लिए कार्यबल गठन किया है। ओडिशा जल्द ही ऐसा करने वाला तीसरा राज्य होगा।’’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘ये कार्यबल संसद द्वारा पारित इन दो कानूनों के कार्यान्वयन की बुनियादी लोकतांत्रिक संरचना को नष्ट कर देते हैं। वैधानिक प्रावधानों, खासकर ग्राम सभा की भूमिका से संबंधित प्रावधानों पर नियंत्रण के पीछे आरएसएस से संबद्ध अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम प्रेरक शक्ति है।’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘पेसा, 1996 और एफआरए, 2006 दोनों कानून लोगों के आंदोलनों से अस्तित्व में आए हैं। इनके मूल चरित्र को ऐसे कार्यबल द्वारा जानबूझकर नष्ट किया जा रहा है।’’

भाषा हक हक मनीषा

मनीषा


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