स्वतंत्र विचार-विमर्श की प्रक्रिया को खत्म किये बिना प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना चाहिए:मुख्य न्यायाधीश
स्वतंत्र विचार-विमर्श की प्रक्रिया को खत्म किये बिना प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना चाहिए:मुख्य न्यायाधीश
राजामहेंद्रवरम (आंध्र प्रदेश) नौ मई (भाषा) आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश लीसा गिल ने शनिवार को यहां कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए और प्रौद्योगिकी का लाभ उठाया जाना चाहिए, न कि इसके जरिये स्वतंत्र विचार-विमर्श की प्रक्रिया को खत्म किया जाए।
न्यायमूर्ति गिल ने कहा कि एआई उपकरण मानवीय विचार-विमर्श का विकल्प नहीं हो सकते, विशेष रूप से ऐसे समय में जब न्यायपालिका में प्रौद्योगिकी और डिजिटलीकरण का महत्व दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है।
गिल के हवाले से एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘एआई के उपयोग में सावधानी बरतें। हमें प्रौद्योगिकी का उपयोग अपने लाभ के लिए करना चाहिए, लेकिन स्वतंत्र विचार-विमर्श को खत्म नहीं करना चाहिए। चैटजीपीटी जैसे उपकरण मानवीय विचार-विमर्श का विकल्प नहीं हो सकते।’’
मुख्य न्यायाधीश ने मध्यस्थता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इसे पारिवारिक विवादों या सड़क दुर्घटनाओं तक सीमित नहीं रखना चाहिए।
उन्होंने वकीलों और न्यायाधीशों से मध्यस्थता को और बढ़ावा देने का आह्वान भी किया।
भाषा सुभाष संतोष
संतोष

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