तेलंगाना विधानसभा ने मनरेगा के बदले लाये गये नये अधिनियम के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया

तेलंगाना विधानसभा ने मनरेगा के बदले लाये गये नये अधिनियम के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया

तेलंगाना विधानसभा ने मनरेगा के बदले लाये गये नये अधिनियम के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया
Modified Date: January 3, 2026 / 12:34 am IST
Published Date: January 3, 2026 12:34 am IST

हैदराबाद, दो जनवरी (भाषा) तेलंगाना विधानसभा ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों के विरोध के बीच मनरेगा कानून को बदलकर केंद्र द्वारा लाये गये वीबी-जी राम जी अधिनियम के खिलाफ प्रस्ताव परित किया। विधानसभा ने पारित प्रस्ताव में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को बहाल किये जाने की मांग की है।

मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि नया कानून गरीबों और महिला मजदूरों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालकर संघीय भावना को कमजोर करता है।

उन्होंने यह भी मांग की कि मनरेगा के तहत वित्तपोषण की व्यवस्था जारी रहे।

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मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि नए कानून के शीर्षक से महात्मा गांधी का नाम हटाने से उनके विचारों की भावना कमजोर होती है।

रेड्डी ने कहा कि कृषि मौसम के दौरान 60 दिन के लिए रोजगार रोकने की व्यवस्था भूमिहीन गरीबों के साथ अन्याय करेगी, इसलिए रोजगार पूरे साल उपलब्ध होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि ‘वीबी-जी राम जी’ कानून महिला विरोधी है, क्योंकि यह काम के दिनों की संख्या घटाता है, और इसके कारण गरीब महिलाएं कठिनाइयों का सामना करती हैं।

भाजपा के विधायकों ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करके अपना विरोध जताया। पार्टी के विधायक पलवाई हरीश बाबू ने यह जानकारी ‘पीटीआई-भाषा’ को दी।

इस बीच, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक कुणमनेनी सांबासिवा राव की कुछ टिप्पणियों ने विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर शाब्दिक हमला किया, जिसपर भाजपा सदस्यों ने आपत्ति जताई।

अध्यक्ष जी. प्रसाद कुमार ने आश्वासन दिया कि वह इस मामले की पड़ताल करेंगे और रिकॉर्ड से आपत्तिजनक टिप्पणियों को हटा देंगे।

भाषा

सुरेश धीरज

धीरज


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