तेलंगाना जाति सर्वेक्षण: रेड्डी समुदाय के पास राज्य की 13.5 प्रतिशत भूमि का स्वामित्व
तेलंगाना जाति सर्वेक्षण: रेड्डी समुदाय के पास राज्य की 13.5 प्रतिशत भूमि का स्वामित्व
हैदराबाद, 17 अप्रैल (भाषा) तेलंगाना में रेड्डी समुदाय कुल जनसंख्या का 4.8 प्रतिशत है जिसके पास राज्य की 13.5 प्रतिशत भूमि का स्वामित्व है। राज्य में कांग्रेस सरकार द्वारा कराये गये जातिगत सर्वेक्षण में यह जानकारी सामने आई है।
सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार इसके बाद यादव समुदाय है, जिसकी राज्य की कुल आबादी में 5.7 प्रतिशत संख्या है और कुल भूमि का 8.7 प्रतिशत स्वामित्व उसके पास है।
पंद्रह अप्रैल को सार्वजनिक की गई सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में प्रति परिवार औसतन सिंचित भूमि 0.7 एकड़ है।
इसमें कहा गया है कि बीसी-बी पेरिका, वेलामा और रेड्डी जातियों को छोड़कर लगभग सभी जातियों के पास राज्य के औसत से कम सिंचित भूमि है।
रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘रेड्डी समुदाय के पास अपनी जनसंख्या के अनुपात में कुल भूमि का सबसे बड़ा हिस्सा है, इसके बाद वेलामा और अनुसूचित जनजाति (एसटी) कोया समुदाय का स्थान आता है। इसके विपरीत, अनुसूचित जाति बेदास और सामान्य श्रेणी के मुसलमानों जैसे समुदायों के पास उनकी जनसंख्या के अनुपात में बहुत कम भूमि है।’’
तेलंगाना सामाजिक-आर्थिक, शैक्षणिक, रोजगार, राजनीतिक और जाति (एसईईईपीसी) सर्वेक्षण-2024 के अनुसार, कार रखने वाले सामान्य जाति के परिवारों की हिस्सेदारी ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) परिवारों की तुलना में तीन गुना और अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के परिवारों की तुलना में लगभग पांच गुना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कार रखने वाले परिवारों में ब्राह्मणों का हिस्सा सबसे अधिक (16.4 प्रतिशत) है-जो राज्य के औसत से पांच गुना से भी अधिक है।
इसमें कहा गया है कि राजू, कम्मा, कापू, कोमाटी, वेलामा और जैन जैसी अन्य सामान्य जातियों के परिवारों में भी कारों की संख्या अधिक है, जिससे उनकी समृद्धि और आर्थिक सुरक्षा का पता चलता है।
रिपोर्ट के अनुसार इसके विपरीत, सबसे वंचित समुदायों में कार का स्वामित्व लगभग न के बराबर है। एसटी कोलम समुदाय में यह आंकड़ा सबसे कम केवल 0.2 प्रतिशत है, जबकि अन्य आदिवासी समूहों जैसे एसटी गोंड और एसटी कोया भी औसत से काफी नीचे हैं।
भाषा
देवेंद्र नरेश
नरेश

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