तेलंगाना: भाकपा (माओवादी) के कुख्यात सदस्य मंदा रूबेन ने आत्मसमर्पण किया

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तेलंगाना: भाकपा (माओवादी) के कुख्यात सदस्य मंदा रूबेन ने आत्मसमर्पण किया

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  • Publish Date - October 7, 2025 / 07:25 PM IST,
    Updated On - October 7, 2025 / 07:25 PM IST

हैदराबाद, सात अक्टूबर (भाषा) प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा)-माओवादी के कुख्यात सदस्य मंदा रूबेन उर्फ ​​कन्नन्ना ने मंगलवार को तेलंगाना के वारंगल जिले में आत्मसमर्पण कर दिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

दक्षिण बस्तर के संभागीय समिति सचिव और दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति के सदस्य रूबेन (67) ने वारंगल के पुलिस आयुक्त सनप्रीत सिंह के समक्ष आत्मसमर्पण किया।

आयुक्त ने बताया कि हनमकोंडा जिले के वंगापाडु गांव के मूल निवासी रूबेन ने तेलंगाना सरकार के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन कार्यक्रम के तहत अपने परिवार के साथ शांतिपूर्ण जीवन जीने की इच्छा व्यक्त की।

उन्होंने बताया कि रूबेन 1979 में आरईसी (अब एनआईटी वारंगल) के छात्रावास मेस में काम करते हुए कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित हुआ।

एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि तत्कालीन भाकपा (माओवादी) महासचिव और आरईसी के पूर्व छात्र नंबाला केशव राव से प्रभावित होकर रूबेन प्रतिबंधित संगठन में शामिल हुआ और भूमिगत हो गया।

रूबेन ने वर्ष 1981 से 1986 तक लंकापापीरेड्डी की कमान में कुंता-बस्तर दस्ते के सदस्य के रूप में काम किया।

वर्ष 1987 में रूबेन को क्षेत्र समिति सदस्य के रूप में पदोन्नत किया गया।

रूबेन को वर्ष 1991 में इलाज के लिए यात्रा करते समय छत्तीसगढ़ पुलिस ने कोठागुडेम में गिरफ्तार कर लिया और उसे जगदलपुर जेल में रखा गया।

एक साल बाद कुख्यात माओवादी तीन अन्य लोगों के साथ भाग निकला और फिर से माओवादी गतिविधियों में शामिल हो गया।

वर्ष 2005 में डिविजन कमेटी सदस्य के रूप में कार्य करते हुए रुबेन खराब स्वास्थ्य के कारण हिंसक गतिविधियों से दूर हो गया और गुंडरायी गांव में अपने परिवार के साथ रहने लगा।

विज्ञप्ति के मुताबिक, मुर्गीपालन और भेड़पालन करते हुए भी रूबेन माओवादियों को आश्रय, भोजन और खुफिया जानकारी उपलब्ध कराता रहा।

विज्ञप्ति में बताया गया कि बिगड़ते स्वास्थ्य, माओवाद की घटती वैचारिक प्रासंगिकता और माओवादी हिंसा के खिलाफ बढ़ते जन आक्रोश का हवाला देते हुए रूबेन ने आत्मसमर्पण करने का फैसला किया।

भाषा जितेंद्र अविनाश

अविनाश