तेलंगाना: रेवंत ने दक्षिणी राज्यों से आनुपातिक परिसीमन फार्मूले के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया

तेलंगाना: रेवंत ने दक्षिणी राज्यों से आनुपातिक परिसीमन फार्मूले के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया

तेलंगाना: रेवंत ने दक्षिणी राज्यों से आनुपातिक परिसीमन फार्मूले के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया
Modified Date: April 14, 2026 / 11:48 pm IST
Published Date: April 14, 2026 11:48 pm IST

हैदराबाद, 14 अप्रैल (भाषा) लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए परिसीमन के आनुपातिक मॉडल के खिलाफ अपने अभियान को तेज करते हुए तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मंगलवार को दक्षिणी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के अपने समकक्षों से इस मुद्दे को हल करने के लिए एकजुट होकर समन्वित प्रयास शुरू करने का आह्वान किया।

रेड्डी ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन (तमिलनाडु), एन. चंद्रबाबू नायडू (आंध्र प्रदेश), सिद्धरमैया (कर्नाटक), पिनराई विजयन (केरल) और एन. रंगासामी (पुडुचेरी) को पत्र लिखकर कहा कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उनके महत्वपूर्ण योगदान के बावजूद, दक्षिणी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश की संसद में आवाज अपेक्षाकृत कम हो जाएगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि आनुपातिक मॉडल के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से दक्षिणी राज्यों के लिए ‘राजनीतिक अन्याय’ होगा, साथ ही वित्तीय और नीतिगत भेदभाव भी जारी रहेगा।

रेड्डी ने दावा किया कि उत्तरी और मध्य क्षेत्रों में अधिक जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों को असमान रूप से लाभ होगा, जिससे प्रभावी रूप से एक ऐसा परिदृश्य बनेगा, जहां प्रगति को दंडित किया जाएगा और जनसांख्यिकीय विस्तार को पुरस्कृत किया जाएगा।

उन्होंने कहा, “इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए यह स्पष्ट है कि खंडित प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं होगी। राष्ट्रीय स्तर पर हमारी चिंताओं को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने के लिए दक्षिणी राज्यों और सभी समान विचारधारा वाले राज्यों के बीच सामूहिक भागीदारी की आवश्यकता बढ़ रही है। इस संबंध में, आइए हम सब मिलकर एक समन्वित प्रयास शुरू करें।”

उन्होंने कहा कि इस तरह के समन्वित प्रयास में दक्षिणी राज्यों और अन्य समान स्थिति वाले, उच्च प्रदर्शन करने वाले और छोटे राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच सहभागिता शामिल होनी चाहिए, साथ ही संसद में इस मुद्दे को उठाना भी आवश्यक है।

भाषा तान्या सुरेश

सुरेश


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