टेलीग्राम का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों और लीक प्रश्नपत्रों के प्रसार में हो रहा : केंद्र की दलील
टेलीग्राम का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों और लीक प्रश्नपत्रों के प्रसार में हो रहा : केंद्र की दलील
नयी दिल्ली, 18 जून (भाषा) केंद्र सरकार ने नीट-यूजी से पहले टेलीग्राम को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित करने के अपने फैसले का बचाव करते हुए बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में दलील दी कि इस मैसेजिंग एप्लिकेशन का इस्तेमाल साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी से लेकर आतंकवाद और लीक प्रश्नपत्रों को प्रसारित करने जैसी गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में सेवारत वैज्ञानिक मयंक ने चिकित्सा के स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 21 जून को दोबारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) से पहले टेलीग्राम पर केंद्र द्वारा लगाई गई रोक के खिलाफ दाखिल याचिका के जवाब में हलफनामा के जरिये ये दलीलें दी। उन्होंने टेलीग्राम की ओर से दाखिल याचिका खारिज करने का अनुरोध किया।
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए हलफनामे में कहा गया है कि यह ऐप साइबर अपराधियों के लिए पसंदीदा मंच बन गया है। वे गैर-कानूनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए फर्जी खाता, छिपी हुई पहचान, चैनल और ग्रुप का इस्तेमाल करते हैं। इन गतिविधियों में वित्तीय धोखाधड़ी, वायरस प्रसारित करना, आंकड़ों में सेंध लगाना और लीक हुए प्रश्नपत्रों को प्रसारित करना शामिल है।
हलफनामा में कहा गया है, ‘‘टेलीग्राम का इस्तेमाल मादक पदार्थ तस्करी, साइबर अपराध, चरमपंथ, आतंकवाद, बच्चों के शोषण और साइबर धोखाधड़ी जैसी गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, और इसकी मुख्य वजह इसकी निजता नीति है।’’
न्यायमूर्ति तेजस करिया की अवकाशकालीन पीठ दोबारा नीट-यूजी आयोजित करने से पहले टेलीग्राम ऐप तक पहुंच सीमित करने के फैसले के खिलाफ कंपनी की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही है।
चिकित्सा के स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए तीन मई को राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) आयेाजित कराई गई थी जिसे प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद 12 मई को रद्द कर दिया गया। पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की जा रही है।
केंद्र की ओर से दाखिल हलफनामा में कहा गया, ‘‘टेलीग्राम खतरनाक किरदारों को जोड़ने वाला नया ‘डार्क वेब’ बन गया है। अपराधियों ने तेज़ी से टेलीग्राम को अपनाया है ताकि वे ऐसे चैनल पर लिंक पोस्ट कर सकें जो जटिल लिंक के जरिए ‘डार्क वेब’ मंच से जुड़ते हैं। इससे अधिकारियों के लिए अपराधियों का पता लगाना और उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है।’’
सरकार ने अदालत को बताया कि हाल के वर्षों में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर इस ऐप से जुड़ी धोखाधड़ी की शिकायतों में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है। उसने बताया कि अकेले 2025 में ही 3,086 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़ी 2.75 लाख से ज़्यादा शिकायतें दर्ज की गईं।
केंद्र ने कहा, ‘‘असीमित सब्सक्राइबर को जोड़ने वाले टेलीग्राम चैनल बड़ी संख्या में लोगों तक मैसेज पहुंचाने के लिए बनाए गए हैं। इनमें सब्सक्राइबर की पहचान एक-दूसरे से छिपी रहती है और चैनल बनाने वाला या चुने हुए एडमिन ही मैसेज पोस्ट कर सकते हैं, जबकि सब्सक्राइबर सिर्फ़ सामग्री देख सकते हैं।’’
सरकार ने चीन, ईरान, फ्रांस, रूस, जर्मनी और ब्राजील जैसे कई देशों में टेलीग्राम के खिलाफ की गई नियामक और प्रवर्तन कार्रवाइयों का भी जिक्र किया। ये कार्रवाइयां स्थानीय कानूनों का पालन न करने, सामग्री में बदलाव करने में नाकामियों और कानून लागू करने से जुड़ी चिंताओं जैसे मुद्दों पर की गईं।
केंद्र ने हालांकि, कहा कि पूरे मंच को प्रतिबंधित करना जरूरत से ज्यादा सख्त कदम होगा और यह सूचना प्रद्यौगिकी अधिनियम और आईटी नियमावली 2021 के कानूनी ढांचे के खिलाफ होगा, जिनमें खास गैर-कानूनी सामग्री के खिलाफ लक्षित कार्रवाई की परिकल्पना की गई है।
सरकार ने अदालत को सूचित किया कि टेलीग्राम ‘सहयोग’ पोर्टल के जरिए जारी किए गए नोटिस का पालन कर रहा है और उसने अधिकारियों द्वारा चिह्नित सभी 404 यूआरएल को हटा दिया है और उन तक पहुंच बाधित कर दी है। इनमें परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी से जुड़े चैनल भी शामिल है।
उच्च न्यायालय ने टेलीग्राम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता और केंद्र का पक्ष रखने के लिए उपस्थित हुए अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश

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