तेलुगु भाषा जीवंत सभ्यता और आध्यात्मिक विरासत को दर्शाती है : मॉरीशस के राष्ट्रपति

तेलुगु भाषा जीवंत सभ्यता और आध्यात्मिक विरासत को दर्शाती है : मॉरीशस के राष्ट्रपति

तेलुगु भाषा जीवंत सभ्यता और आध्यात्मिक विरासत को दर्शाती है : मॉरीशस के राष्ट्रपति
Modified Date: January 4, 2026 / 03:24 pm IST
Published Date: January 4, 2026 3:24 pm IST

गुंटूर (आंध्र प्रदेश), चार जनवरी (भाषा) मॉरीशस के राष्ट्रपति धरम गोखूल ने रविवार को कहा कि तेलुगु महज एक भाषा नहीं,बल्कि गहरी आध्यात्मिक विरासत वाली एक जीवंत सभ्यता है।

गुंटूर जिले में आयोजित तीसरे विश्व तेलुगु सम्मेलन को संबोधित करते हुए गोखूल ने इसे विश्वभर के तेलुगु भाषी समुदायों को एकजुट करने वाला एक ऐतिहासिक आयोजन बताया।

सभा को संबोधित करते हुए गोखूल ने कहा, ‘‘तेलुगु मात्र एक भाषा नहीं है; यह एक जीवंत सभ्यता का प्रतीक है और एक गहन आध्यात्मिक विरासत को समेटे हुए है।’’

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उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन 2026 की शुरुआत में हो रहा है, जो परंपरागत रूप से चिंतन और नवीनीकरण का प्रतीक है। उन्होंने इसे मॉरीशस में राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाए जाने वाले उगादी से जोड़ा।

उन्होंने कहा कि तेलुगु एक क्षेत्रीय भाषा से विकसित होकर अब वैश्विक पहचान बना चुकी है और वर्तमान में 50 से अधिक देशों में बोली जाती है। उन्होंने इस कार्यक्रम में भाग ले रहे लगभग 50 देशों से आए प्रतिनिधियों का स्वागत भी किया।

गोखूल तीन जनवरी को अपनी छह दिवसीय भारत यात्रा के तहत शनिवार को आंध्र प्रदेश पहुंचे।

भाषा शफीक दिलीप

दिलीप


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