पंढरपुर मंदिर में भगवान विट्ठल की मूर्ति पर रासायनिक परत चढ़ाने पर लगी अस्थायी रोक
पंढरपुर मंदिर में भगवान विट्ठल की मूर्ति पर रासायनिक परत चढ़ाने पर लगी अस्थायी रोक
ठाणे/पंढरपुर, 23 जून (भाषा) महाराष्ट्र के सोलापुर की एक अदालत ने धार्मिक भावनाओं का हवाला देते हुए पंढरपुर मंदिर समिति को भगवान विट्ठल की मूर्ति पर रासायनिक सुरक्षात्मक परत चढ़ाने से अस्थायी रूप से रोक दिया है।
संयुक्त दीवानी न्यायाधीश एस. एस. राउल ने सोमवार को महाराष्ट्र मंदिर महासंघ और वारकरी समूहों के सदस्यों द्वारा दायर एक आवेदन पर यह अंतरिम आदेश पारित किया। यह आवेदन श्री विट्ठल रुक्मिणी मंदिर समिति के उस निर्णय के खिलाफ दायर किया गया था, जिसमें मंगलवार और बुधवार को मूर्ति पर परत चढ़ाने का काम प्रस्तावित था।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि एपॉक्सी रेजिन जैसे आधुनिक रसायनों का उपयोग धार्मिक शास्त्रों का उल्लंघन है और इससे प्राचीन मूर्ति की पवित्रता प्रभावित होती है। उन्होंने इसके बजाय पारंपरिक प्राकृतिक ‘वज्रलेप’ लगाने की वकालत की।
वहीं मंदिर समिति ने जवाब दिया कि जुलाई में होने वाली आषाढ़ी एकादशी तीर्थयात्रा से पहले मूर्ति की अधिक क्षति को रोकने के लिए पुरातत्व विभाग ने मूर्ति की मरम्मत की सलाह दी थी। साथ ही समिति ने पंढरपुर मंदिर अधिनियम के तहत याचिकाकर्ताओं की याचिका दायर करने की पात्रता पर भी सवाल उठाए।
न्यायाधीश ने समिति की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि प्रशासनिक समिति केवल एक संरक्षक के रूप में कार्य कर रही है और मंदिर के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने में सहायता करती है।
अदालत ने कहा, “हालांकि, वे मूर्ति पर किसी भी प्रकार की संप्रभुता या स्वामित्व का दावा नहीं कर सकते। मूर्ति सभी भक्तों की है और इसलिए मूर्ति को प्रभावित करने वाला कोई भी कार्य सभी भक्तों की प्राथमिक चिंता है।”
अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मूर्ति अच्छी स्थिति में है और भक्तों की आपत्तियों को दरकिनार करने की कोई तत्काल आपात स्थिति नहीं थी।
भाषा प्रचेता वैभव
वैभव

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