विकास परियोजनाओं को रोकने के लिए याचिकाएं दायर करने की प्रवृत्ति निंदनीय : न्यायालय
विकास परियोजनाओं को रोकने के लिए याचिकाएं दायर करने की प्रवृत्ति निंदनीय : न्यायालय
नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने विकास परियोजनाओं को रोकने के लिए याचिकाएं दायर करने की प्रवृत्ति की निंदा करते हुए सोमवार को पूछा कि अगर ऐसी याचिकाएं दायर की जाती रहीं, तो देश कैसे प्रगति करेगा।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, “हमें इस देश में एक भी ऐसी परियोजना दिखाएं, जहां इन तथाकथित पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कहा हो कि हम इस परियोजना का स्वागत करते हैं।”
ये टिप्पणियां उस पीठ की ओर से आईं, जो राष्ट्रीय हरित अधिकरण की पश्चिमी क्षेत्र की पीठ के एक आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
अधिकरण ने गुजरात में पिपावा बंदरगाह के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए दी गई पर्यावरण और तटीय विनियमन क्षेत्र की मंजूरी को रद्द करने की मांग वाली अपील को खारिज कर दिया था।
शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की, “इस देश में जिस तरह की याचिकाएं दायर की जा रही हैं, उनका मकसद सिर्फ विकास को रोकना है। यही समस्या है। देश प्रगति कैसे करेगा?”
पीठ ने हालांकि, स्पष्ट किया कि अदालतें हमेशा से ही पर्यावरण संबंधी मुद्दों को लेकर चिंतित रही हैं और पर्यावरण को प्रभावित करने वाली किसी भी चीज की आलोचना करती हैं।
याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि एनजीटी ने इस मामले में बहुत विस्तृत आदेश पारित किया है।
पीठ ने याचिकाकर्ता को एनजीटी के समक्ष पुनर्विचार याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी, जिसमें विशेष रूप से यह बताया जा सके कि पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट में उसकी ओर से उठाए गए मुद्दे पर विधिवत विचार किया गया था या नहीं।
पीठ ने एनजीटी से इस पहलू पर विचार करने को कहा।
भाषा
प्रशांत दिलीप
दिलीप

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