आपत्तिजनक प्रश्न पूछने वाले जनगणना अधिकारी को दंड का सामना करना पड़ेगा

आपत्तिजनक प्रश्न पूछने वाले जनगणना अधिकारी को दंड का सामना करना पड़ेगा

आपत्तिजनक प्रश्न पूछने वाले जनगणना अधिकारी को दंड का सामना करना पड़ेगा
Modified Date: March 26, 2026 / 10:22 pm IST
Published Date: March 26, 2026 10:22 pm IST

नयी दिल्ली, 26 मार्च (भाषा) जनगणना के दौरान जानबूझकर ‘‘कोई भी आपत्तिजनक या अनुचित प्रश्न’’ पूछने वाले अधिकारी को दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की सजा हो सकती है। जनगणना आयुक्त द्वारा जारी नवीनतम परिपत्र में यह कहा गया है।

सभी राज्यों को भेजे गए एक पत्र में, जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 11 के तहत निर्धारित दंडों की सूची दी है, जिसमें दोषी पाए जाने पर 1,000 रुपये के जुर्माने से लेकर तीन साल तक का कारावास या दोनों हो सकता है।

इस आदेश में कहा गया है कि यदि कोई जनगणना अधिकारी जानबूझकर कोई आपत्तिजनक या अनुचित प्रश्न पूछता है या जानबूझकर कोई गलत जानकारी देता है अथवा केंद्र सरकार या राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के बिना जनगणना के दौरान प्राप्त किसी भी जानकारी का खुलासा करता है, तो उसे दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की सजा हो सकती है।

आदेश के मुताबिक, जनगणना के दौरान किसी भी कर्तव्य का पालन करते समय उचित सावधानी बरतने में लापरवाही करने वाला, किसी आदेश की अवहेलना करने वाला या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसे किसी कर्तव्य का पालन करने में बाधा डालने वाला या अवरोध उत्पन्न करने वाला अधिकारी भी दोषी पाए जाने पर दंड का सामना करेगा।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत की जनगणना 2027 के लिए 11,718 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, जिसमें पहली बार जातिगत गणना भी शामिल होगी।

भाषा शफीक संतोष

संतोष


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