कॉलेजियम ने हाईकोर्ट के प्रस्तावित मुख्य न्यायाधीशों के तबादले का निर्णय पहले ही किया
कॉलेजियम ने हाईकोर्ट के प्रस्तावित मुख्य न्यायाधीशों के तबादले का निर्णय पहले ही किया
नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम ने ‘नीतिगत निर्णय’ लिया है जिसके मुताबिक, जिस न्यायाधीश को किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का प्रस्ताव हो, उसका तबादला पद रिक्त होने से काफी पहले, बेहतर होगा कि रिक्ति उत्पन्न होने से लगभग दो महीने पूर्व ही कर दिया जाए।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने कहा कि यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि न्यायाधीश इस बीच उस उच्च न्यायालय के कामकाज से अच्छी तरह परिचित हो जाएं और वर्तमान मुख्य न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति पर मुख्य न्यायाधीश का कार्यभार संभाल सकें।
शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किए गए एक बयान में कहा गया है, ‘‘कॉलेजियम ने एक नीतिगत निर्णय लिया है कि न्याय प्रशासन की दक्षता और गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण करने के लिए प्रस्तावित न्यायाधीश का तबादला रिक्ति उत्पन्न होने से करीब दो महीने पहले किया जाए।’’
बयान में कहा गया है, ‘‘ इस नीतिगत निर्णय के बाद, कॉलेजियम ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की न्यायाधीश, न्यायमूर्ति लीसा गिल के तबादले की सिफारिश करने और उन्हें आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में रिक्ति उत्पन्न होने की तिथि से नियुक्त करने का प्रस्ताव दिया है।’’
शीर्ष अदालत के कॉलेजियम की बैठक 26 फरवरी को हुई थी। कॉलेजियम ने केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी को मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की भी सिफारिश की, क्योंकि उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पांच मार्च, 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
एक अलग बयान में कॉलेजियम ने नौ अधिवक्ताओं – मोहम्मद नदीम सेराज, रंजन कुमार झा, कुमार मनीष, संजीव कुमार, गिरिजीश कुमार, आलोक कुमार, राज कुमार, राणा विक्रम सिंह और विकास कुमार को पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के प्रस्तावों को मंजूरी दी।
भाषा सुरभि प्रशांत
प्रशांत

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