न्यायालय ने 25 पीआईएल दायर करने वाले याचिकाकर्ता से अदालत के बजाय प्राधिकरणों के पास जाने को कहा

न्यायालय ने 25 पीआईएल दायर करने वाले याचिकाकर्ता से अदालत के बजाय प्राधिकरणों के पास जाने को कहा

न्यायालय ने 25 पीआईएल दायर करने वाले याचिकाकर्ता से अदालत के बजाय प्राधिकरणों के पास जाने को कहा
Modified Date: April 10, 2026 / 02:01 pm IST
Published Date: April 10, 2026 2:01 pm IST

नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने विभिन्न मुद्दों पर 25 अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर करने वाले एक अधिवक्ता से शुक्रवार को कहा कि उन्हें अदालत का रुख करने से पहले संबंधित प्राधिकरणों के पास जाना चाहिए।

जैसे ही मामले की सुनवाई शुरू हुई, याचिकाकर्ता के रूप में स्वयं पेश हुए अधिवक्ता सचिन गुप्ता ने भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि वह अपनी सभी जनहित याचिकाएं वापस लेना चाहते हैं।

इस पर प्रधान न्यायाधीश, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने गुप्ता से कहा, ‘‘आप अपने पेशे पर ध्यान दें। आपको सीधे अदालत का दरवाजा खटखटाने के बजाय संबंधित प्राधिकरणों के पास जाना चाहिए और उन्हें विभिन्न मुद्दों पर जानकारी देनी चाहिए।’’

पीठ ने कहा कि उचित समय आने पर यदि आवश्यकता हुई, तो न्यायालय उनकी याचिकाओं पर विचार भी करेगा।

सीजेआई ने कहा कि बार के सदस्य और कानून की जानकारी रखने वाले व्यक्ति होने के नाते याचिकाकर्ता को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए मुद्दों की पहचान करनी चाहिए और संबंधित अधिकारियों को जागरूक बनाने का प्रयास करना चाहिए।

पीठ ने यह भी कहा कि यदि कोई कार्रवाई नहीं होती है, तब याचिकाकर्ता अदालत का रुख कर सकता है।

उच्चतम नयायालय ने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध 25 जनहित याचिकाओं को वापस लेने की अनुमति दे दी।

याचिकाकर्ता द्वारा दायर इन जनहित याचिकाओं में कई तरह के निर्देश देने का अनुरोध किया गया था, जिनमें देश में आधिकारिक कार्यों के लिए एक सामान्य संपर्क भाषा विकसित करने की नीति बनाने और आम जनता में कानूनी जागरूकता फैलाने के लिए टेलीविजन पर कानूनी कार्यक्रम शुरू करने की नीति तैयार करने की मांग शामिल थी।

इन याचिकाओं में यह भी अनुरोध किया गया था कि साबुन में इस्तेमाल होने वाले रसायनों के उपयोग को लेकर दिशा-निर्देश तय किए जाएं, ताकि केवल वे रसायन इस्तेमाल हों जो हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करें, न कि त्वचा के लिए जरूरी बैक्टीरिया को।

एक अन्य जनहित याचिका में भिखारियों, ट्रांसजेंडर जैसे वंचित वर्गों के उत्थान के लिए नीति बनाने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।

उच्चतम न्यायालय ने नौ मार्च को गुप्ता द्वारा दायर पांच ‘‘निरर्थक’’ जनहित याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इनमें एक याचिका ऐसी भी थी, जिसमें यह जानने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन कराने की मांग की गई थी कि क्या प्याज और लहसुन में ‘तामसिक’ (नकारात्मक) ऊर्जा होती है।

सीजेआई ने गुप्ता से नाराजगी जताते हुए कहा था, ‘‘आधी रात को ये सब याचिकाएं तैयार करते हो क्या?’’ प्रधान न्यायाधीश ने इन जनहित याचिकाओं को “अस्पष्ट, निरर्थक और निराधार” करार दिया था।

पीठ ने गुप्ता की चार अन्य जनहित याचिकाएं भी खारिज कर दी थीं, जिनमें से एक याचिका में शराब और तंबाकू उत्पादों में कथित रूप से मौजूद हानिकारक सामग्री को नियंत्रित करने का निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया था।

भाषा गोला वैभव

वैभव


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