अदालत ने व्याकरणिक त्रुटियों वाली शिकायत दायर करने के लिए वादी पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया
अदालत ने व्याकरणिक त्रुटियों वाली शिकायत दायर करने के लिए वादी पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया
नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने व्याकरण संबंधी त्रुटियों और अर्थहीन शब्दों से भरी एक शिकायत दायर करने के लिए एक वादी पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
अदालत ने कहा कि यह आवेदन मानवीय निगरानी के बिना ‘तकनीकी हस्तक्षेप’ या एआई-संचालित मसौदा तैयार करने वाले उपकरणों पर निर्भरता का एक उदाहरण है।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) नेहा मित्तल एक महिला की शिकायत पर सुनवाई कर रही थीं, जिसमें दिल्ली पुलिस को एक प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
तीस मार्च के एक आदेश में, शिकायत के ‘विचारणीय नहीं होने’ और अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर होने के आधार पर खारिज करते हुए, एसीजेएम ने कहा, ‘इस आदेश को जारी करने से पहले, यह अदालत उस मसौदे की गुणवत्ता को उजागर करना उचित समझती है, जिसे उसके समक्ष प्रस्तुत किया गया है।’
उन्होंने कहा कि आवेदन में “व्याकरण संबंधी कई गलतियां” थीं, साथ ही “कुछ निरर्थक शब्दों का भी प्रयोग” किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप न्यायिक समय की बर्बादी हुई, क्योंकि इन शब्दों का अर्थ निकालने के प्रयास किए गए, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।
मजिस्ट्रेट ने शिकायतकर्ता को दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के पास 20,000 रुपये का जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया।
भाषा अमित दिलीप
दिलीप

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