न्यायालय छह अक्टूबर को विधायी विशेषाधिकारों से जुड़े मुद्दे पर सुनवाई करेगा

न्यायालय छह अक्टूबर को विधायी विशेषाधिकारों से जुड़े मुद्दे पर सुनवाई करेगा

न्यायालय छह अक्टूबर को विधायी विशेषाधिकारों से जुड़े मुद्दे पर सुनवाई करेगा
Modified Date: August 12, 2026 / 04:32 pm IST
Published Date: August 12, 2026 4:32 pm IST

नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि विधायकों के विधायी विशेषाधिकारों के दायरे और बोलने एवं अभिव्यक्ति की आजादी के मौलिक अधिकार पर इसके प्रभाव से जुड़े प्रावधानों की व्याख्या के मामले में सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ छह अक्टूबर से सुनवाई शुरू करेगी।

अदालत ने कहा कि बिक्री कर पर अतिरिक्त उपकर लगाने की राज्य विधानमंडल की शक्ति से जुड़े एक अलग मामले में भी सात न्यायाधीशों की पीठ 22 सितंबर से सुनवाई करेगी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि 22 सितंबर को सूचीबद्ध मामले की सुनवाई दोपहर बाद के सत्र में अपराह्न दो बजे से शाम चार बजे तक की जाएगी ताकि सुबह के सत्र में अन्य मामलों की सुनवाई जारी रखी जा सके।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा,‘‘एक तरीका यह है कि मामले को अपराह्न दो बजे से शाम चार बजे तक सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। इससे हमें नए और अन्य विविध मामलों की सुनवाई का भी मौका मिलेगा।’’

उन्होंने कहा कि दूसरा तरीका यह है कि सप्ताह में तीन दिन मंगलवार, बुधवार और बृहस्पतिवार पूरे दिन मामले में दलीलें सुनी जाएं।

पीठ ने कहा कि छह अक्टूबर को सूचीबद्ध मामले की सुनवाई संभवत: पूर्वाह्न 11 बजे शुरू की जाएगी।

विधायकों के विधायी विशेषाधिकारों के दायरे से संबंधित प्रावधानों की व्याख्या और बोलने एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार से संबंध का सवाल दिसंबर 2003 में पांच न्यायाधीशों की पीठ को भेजा गया था।

शीर्ष अदालत ने आठ दिसंबर 2003 के अपने आदेश में कहा था, ‘‘यह स्पष्ट है कि संविधान के अनुच्छेद 194(3), 19(1)(क), इन दोनों अनुच्छेदों के बीच अंतर्संबंध, अनुच्छेद 21 और संविधान के अन्य प्रावधानों की व्याख्या से जुड़े कानून के महत्वपूर्ण प्रश्न इसमें शामिल हैं।’’

दिसंबर 2004 में जब यह मामला पांच न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष आया तो उसे इस मुद्दे पर दो अलग-अलग पीठों द्वारा दिए गए परस्पर विरोधी मतों की जानकारी दी गई।

इसके बाद पांच न्यायाधीशों की पीठ ने सिफारिश की कि इस मुद्दे पर अंतिम और आधिकारिक निर्णय के लिए इसे सात न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष रखा जाए।

‘एन. रवि एवं अन्य बनाम तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष’ शीर्षक वाली याचिकाओं में से एक में यह सवाल उठाया गया है कि क्या मौलिक अधिकार विधायी विशेषाधिकारों पर वरीयता रखते हैं।

यह मामला वर्ष 2003 का है। उस समय पत्रकार एन. रवि और अन्य ने तमिलनाडु विधानसभा के तत्कालीन अध्यक्ष के. कालीमुथु द्वारा विशेषाधिकार हनन और अवमानना के आरोप में उनकी गिरफ्तारी का आदेश दिए जाने के बाद उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।

शीर्ष अदालत ने उस समय छह पत्रकारों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। बाद में इस मुद्दे पर आए परस्पर विरोधी फैसलों को देखते हुए मामले को सात न्यायाधीशों की पीठ के पास भेज दिया गया।

इन फैसलों में से एक में कहा गया था कि मौलिक अधिकारों को सर्वोच्चता दी जानी चाहिए जबकि 1965 के एक फैसले में कहा गया था कि मौलिक अधिकार संसदीय विशेषाधिकारों के अधीन हैं।

भाषा खारी नरेश

नरेश


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