भविष्य उन अर्थव्यवस्थाओं का है जो पारिस्थितिक संतुलन को कायम रखते हुए विकास कर सकती हैं: राधाकृष्णन

भविष्य उन अर्थव्यवस्थाओं का है जो पारिस्थितिक संतुलन को कायम रखते हुए विकास कर सकती हैं: राधाकृष्णन

भविष्य उन अर्थव्यवस्थाओं का है जो पारिस्थितिक संतुलन को कायम रखते हुए विकास कर सकती हैं: राधाकृष्णन
Modified Date: May 30, 2026 / 03:44 pm IST
Published Date: May 30, 2026 3:44 pm IST

पणजी, 30 मई (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने शनिवार को कहा कि भविष्य उन अर्थव्यवस्थाओं का है जो पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखते हुए विकास हासिल कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि गोवा में सतत तटीय विकास के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरने की क्षमता है।

राधाकृष्णन ने यहां गोवा राज्य स्थापना दिवस समारोह में कहा कि गोवा उभरते हुए समुद्री अर्थव्यवस्था क्षेत्र (ब्लू इकोनॉमी) में देश का नेतृत्व करने के लिए बेहतर स्थिति में है।

तेजी से बदलती दुनिया के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में गोवा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि इसने यह प्रदर्शित किया है कि कोई भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों को खोए बिना और स्थानीय परंपराओं को संरक्षित करते हुए आधुनिकता को अपना सकता है।

इस मौके पर गोवा के राज्यपाल पी अशोक गजपति राजू और मुख्यमंत्री डॉ प्रमोद सावंत भी मौजूद थे।

राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘भविष्य उन अर्थव्यवस्थाओं का है जो पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखते हुए विकास कर सकती हैं और गोवा सतत तटीय विकास के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर सकता है।’’

गोवा के समुद्री संसाधनों और मत्स्य पालन क्षेत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में समुद्री अर्थव्यवस्था एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और इस बात पर खुशी व्यक्त की कि राज्य पहले से ही उस दिशा में आगे बढ़ रहा है।

‘ब्लू इकोनॉमी’ शब्द का तात्पर्य आर्थिक विकास, बेहतर आजीविका और रोजगार सृजन के लिए महासागर और तटीय संसाधनों के सतत उपयोग और संरक्षण से है।

उन्होंने कहा कि विकास को संतुलित और समावेशी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास को तब तक सार्थक नहीं माना जा सकता जब तक कि इससे समाज के हर वर्ग को लाभ न मिले।

राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘किसी भी विकास को तब तक विकास नहीं कहा जा सकता जब तक वह समाज के हर वर्ग के लिए समावेशी न हो।’’

उन्होंने कहा कि गोवा की पारिस्थितिकी, तटरेखा, नदियों, जंगलों और विरासत का संरक्षण केवल राज्य की जिम्मेदारी नहीं बल्कि एक ‘‘राष्ट्रीय अनिवार्यता’’ है।

उन्होंने कहा कि गोवा को न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए बल्कि यहां के लोगों और प्रकृति के बीच सामंजस्य के लिए भी विश्व स्तर पर सराहा जाता है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस संतुलन को बनाए रखना आवश्यक है।

राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘गोवा का भविष्य युवाओं की कल्पनाशीलता और नेतृत्व से आकार लेगा।’’

गोवा राज्य स्थापना दिवस के मौके पर उपराष्ट्रपति ने एकता, समृद्धि, सतत विकास और सामाजिक सद्भाव को लेकर प्रतिबद्धता का आह्वान किया। उन्होंने नागरिकों से एक ऐसे गोवा के निर्माण के लिए कार्य करने का आग्रह किया जो सांस्कृतिक रूप से जीवंत, आर्थिक रूप से सशक्त और सामाजिक रूप से संवेदनशील बना रहे।

भाषा

देवेंद्र पवनेश

पवनेश


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