डोडा में मारे गए तीन सैनिकों का अंतिम संस्कार हरियाणा, पंजाब में उनके पैतृक स्थान पर किया गया
डोडा में मारे गए तीन सैनिकों का अंतिम संस्कार हरियाणा, पंजाब में उनके पैतृक स्थान पर किया गया
यमुनानगर/रूपनगर 24 जनवरी (भाषा) जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में हाल में सेना का वाहन खाई में गिरने से जान गंवाने वाले 10 सैनिकों में शामिल सुधीर नरवाल, मोहित चौहान और जोबनजीत सिंह के पार्थिव शरीर का शनिवार को हरियाणा और पंजाब में उनके पैतृक स्थानों पर अंतिम संस्कार किया गया।
आतंकवाद विरोधी अभियान के लिए सैनिकों को ले जा रहा सेना का बख्तरबंद वाहन बृहस्पतिवार को खाई में गिर गया था।
यह दुर्घटना दोपहर के आसपास भदेरवाह-चंबा अंतरराज्यीय सड़क पर स्थित 9,000 फुट ऊंचे खानी शिखर पर हुई, जब बुलेटप्रूफ वाहन ‘कैस्पर’ के चालक ने नियंत्रण खो दिया और वाहन 200 फीट गहरी खाई में गिर गया।
नरवाल का अंतिम संस्कार यमुनानगर जिले के शेरपुर गांव में किया गया, जबकि चौहान का अंतिम संस्कार झज्जर जिले के गिजारोध गांव में किया गया।
सिंह का अंतिम संस्कार पंजाब के रूपनगर जिले में नूरपुर बेदी के पास चानोली गांव में हुआ।
नरवाल (30) का शव “भारत माता की जय” के नारों के बीच शेरपुर पहुंचा। उनके परिवार वाले बेहद दुखी थे।
शोक संतप्त लोग सैनिक को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्रित हुए थे।
नरवाल के चार वर्षीय बेटे ने चिता को अग्नि दी। हरियाणा के मंत्री श्याम सिंह राणा, पूर्व मंत्री कंवर पाल गुर्जर और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं, प्रशासनिक अधिकारी और सेना के प्रतिनिधि इस मौके पर उपस्थित थे।
झज्जर में शोकाकुल लोगों ने चौहान (26) को अंतिम विदाई दी। उनके छोटे भाई ने “भारत माता की जय” और “मोहित अमर रहे” के नारों के बीच चिता को अग्नि दी।
पांच साल पहले सेना में भर्ती हुए चौहान के परिवार में माता-पिता, पत्नी और भाई हैं। वह पिछले साल नवंबर में अपने घर आए थे।
सिंह (23) अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे। हाल ही में उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर में हुई थी।
उनके पार्थिव शरीर को रूपनगर लाया गया, जहां गौशाला रोड स्थित श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
सिंह की चिता को उनके पिता बलबीर सिंह ने अग्नि दी। बलबीर सिंह पूर्व सैनिक हैं और उन्होंने सेना की वर्दी पहनकर अपने बेटे को अंतिम सलामी दी।
सेना और पंजाब पुलिस ने भी सैनिक को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें औपचारिक सलामी दी।
सिंह की शादी एक मार्च को नूरपुर बेदी के पास स्थित रोली गांव में होनी थी।
इस अचानक हुई त्रासदी ने परिवार के सपनों को चकनाचूर कर दिया है।
भाषा प्रशांत माधव
माधव


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