युद्ध में सफलता का पैमाना हमेशा भूभाग रहेगा: जनरल सेठ
युद्ध में सफलता का पैमाना हमेशा भूभाग रहेगा: जनरल सेठ
नयी दिल्ली, 27 सितंबर (भाषा) सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने रविवार को कहा कि युद्ध में जीत का आकलन हमेशा क्षेत्रीय नियंत्रण के आधार पर किया जाएगा और ऐसे में भूभाग ही सफलता का एकमात्र ठोस एवं ‘‘निर्विवाद पैमाना’’ होगा।
उन्होंने रविवार को कहा कि सेना में लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों को झेलने की क्षमता होनी चाहिए, जबकि प्रौद्योगिकी से सैनिक अधिक तेज और बेहतर सूचनाओं से लैस बनने चाहिए।
जनरल सेठ ने सेना की अभियानगत तैयारियों को बढ़ाने के लिए ‘समर्थ’ दृष्टिकोण पेश किया।
उन्होंने कहा कि जब कोई संकट लंबे समय तक बना रहता है, तब आत्मनिर्भरता वह निर्णायक कारक बनती है, जो विजेता और पराजित के बीच अंतर उत्पन्न करती है।
एनडीटीवी रक्षा शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में सेना प्रमुख ने कहा कि दक्षता विकसित करने की गति ‘‘प्रौद्योगिकी की गति’’ से धीमी है, इसलिए दक्षता विकास को ‘समर्थ’ बनाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि एक प्रभावी सेना में बदलते खतरों की तुलना में अपनी दक्षताओं को तेजी से अनुकूलित और उन्नत करने की क्षमता होनी चाहिए।
जनरल सेठ ने कहा कि साथ ही उसे स्वयं का आधुनिकीकरण करते हुए ‘‘परिवर्तनकारी युद्धों’’ के दौर में किसी भी अभियान के लिए तैयार रहना चाहिए।
उन्होंने ‘समर्थ’ (एसएएमएआरटीएच) शब्द के जरिए भारतीय सेना के लिए अपना दृष्टिकोण बताया। जनरल सेठ ने इस अवधारणा के प्रत्येक अक्षर को समझाते हुए कहा कि ‘एस’ का मतलब ‘सस्टेनेबिलिटी’ (स्थिरता) है, यानी लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों को झेलने की क्षमता। ‘ए’ का अर्थ ‘ऐडेपटेशन’ (अनुकूलन) और ‘एम’ का अर्थ ‘मॉडर्ननाइजेशन’ (आधुनिकीकरण) है, ताकि सेना अभियान के लिए तैयार रह सके।
उन्होंने कहा कि अगले ‘ए’ का अर्थ ‘एसेलेरेशन’ (दक्षताओं में तेज से वृद्धि) है, जिसमें पुरानी प्रणालियों की प्रभावशीलता बढ़ाने वाली क्षमताओं का एकीकरण और प्रौद्योगिकी का समावेश शामिल है।
सेना प्रमुख ने कहा कि वहीं ‘आर’ का अर्थ ‘रेजिलिएंस (लचीलापन) है, जबकि ‘टी’ टेक्नोलॉजी (प्रौद्योगिकी) को दर्शाता है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), स्वायत्त प्रणालियां, रोबोटिक्स, ड्रोन समेत अन्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वहीं ‘एच’ का अर्थ ‘ह्यूमन-मशीन’ (मानव-मशीन) समन्वय है।
जनरल सेठ ने कहा, ‘‘प्रौद्योगिकी को हमारे सैनिकों को अधिक तेज, बेहतर सूचनाओं से लैस और अधिक प्रभावी बनाना चाहिए। इससे उन्हें बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलनी चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यही ‘समर्थ’ का अर्थ है- एक दक्ष बल होना, जिसमें सहनशीलता और अनुकूलन की क्षमता हो तथा जो परिवर्तनकारी युद्धों के इस दौर में दूसरों से आगे रहने में सक्षम हो।’’
जनरल सेठ ने यह भी आगाह किया कि ‘‘एक ही तरीका सभी के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता’’, क्योंकि भारत में भूभाग और खतरों की प्रकृति में काफी विविधता है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना को ‘‘दूर तक मार करने वाली क्षमता और मजबूत क्षमता’’ दोनों की जरूरत है।
जनरल सेठ ने कहा कि बहु-क्षेत्रीय युद्ध में सूचना और संज्ञानात्मक क्षेत्रों को लेकर काफी चर्चा होती है, लेकिन युद्ध के दो स्थायी तत्व भूभाग और योद्धा हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘इस सारी चर्चा के बीच एक हकीकत नहीं बदलती—भूभाग। भूभाग हमेशा सफलता का एकमात्र ठोस और निर्विवाद पैमाना रहेगा। जीत का आकलन पहले भी क्षेत्रीय नियंत्रण के आधार पर होता था, आज भी होता है और आगे भी इसी आधार पर होगा। इस भूभाग पर कब्जा किया जाएगा, इसे सुरक्षित रखा जाएगा और इसकी रक्षा योद्धा (सैनिक) ही करेंगे।’’
सेना प्रमुख ने कहा, ‘‘मैं दक्षता विकास के केंद्र में आत्मनिर्भर योद्धा को रखना चाहता हूं, क्योंकि योद्धा ही आत्मनिर्भरता का अंतिम लक्ष्य है।’’
भाषा आशीष जितेंद्र
जितेंद्र

Facebook


