जनकपुरी में गड्ढे में गिरने से हुई मौत के मामले में पुलिस ने 877 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया

जनकपुरी में गड्ढे में गिरने से हुई मौत के मामले में पुलिस ने 877 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया

जनकपुरी में गड्ढे में गिरने से हुई मौत के मामले में पुलिस ने 877 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया
Modified Date: April 9, 2026 / 10:37 pm IST
Published Date: April 9, 2026 10:37 pm IST

नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) दिल्ली पुलिस ने जनकपुरी में गड्ढे में गिरने से बाइक सवार की मौत के मामले में 877 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया है और तीन आरोपियों को नामज़द किया है। आरोपपत्र में निर्माण परियोजना के क्रियान्वयन से जुड़ी कथित खामियों का विस्तृत विवरण दिया है।

एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि आरोप पत्र सात अप्रैल को अदालत में दाखिल किया गया था और इस मामले में प्राथमिकी छह फरवरी को दर्ज की गई थी।

पुलिस के बयान के अनुसार, आरोपियों में मुख्य ठेकेदार कंपनी केकेएसपीयूएन प्राइवेट लिमिटेड का निलंबित निदेशक हिमांशु गुप्ता (45), परियोजना से जुड़ा उप-ठेकेदार राजेश कुमार (47) और स्थल पर तैनात मजदूर योगेश (23) शामिल हैं।

यह हादसा पांच फरवरी की रात को तब हुआ जब कैलाशपुरी निवासी कमल ध्यानी रोहिणी स्थित अपने कार्यालय से बाइक से घर लौट रहा था और जनकपुरी इलाके में दिल्ली जल बोर्ड द्वारा खोदे गए 15 फुट गहरे गड्ढे में गिर गया और उसकी मौत हो गई।

आरोपपत्र में आरोपियों की भूमिका और जिम्मेदारियों, संविदात्मक व्यवस्थाओं और घटना के समय घटनास्थल की स्थितियों और समन्वय के बारे में विस्तृत निष्कर्ष शामिल हैं।

पुलिस ने कहा कि सुरक्षा मानदंडों का अनुपालन, श्रमिकों की तैनाती और काम के दौरान अपनाए गए तरीकों सहित कई पहलुओं की जांच की गई।

अधिकारी ने बताया कि गवाहों के बयान, तकनीकी आकलन और दस्तावेजी साक्ष्य आरोपपत्र का हिस्सा हैं।

ठेकेदार कंपनी का वरिष्ठ पदाधिकारी हिमांशु गुप्ता समग्र पर्यवेक्षण और सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन को सुनिश्चित करने का कथित रूप से जिम्मेदार था, जबकि उप-ठेकेदार राजेश कुमार पर ज़मीन पर काम करवाने की कथित रूप से जिम्मेदारी थी।

इस मामले में घटनास्थल पर कार्यरत मजदूर योगेश को भी नामज़द किया गया है।

पुलिस के एक सूत्र ने बताया कि उन्होंने मामले की गहन जांच की और पूछताछ के दौरान यह सामने आया कि वहां मौजूद मजदूर को पूरे मामले की जानकारी थी और उसने अपने सुपरवाइजर को भी इसकी सूचना दी, जिसने आगे गुप्ता को इस मामले के बारे में बताया।

सूत्र ने बताया, ‘घटना की जानकारी होने के बावजूद किसी ने भी पुलिस को सूचित करने की जरूरत नहीं समझी, जबकि पुलिस की कई टीमें और ध्यानी के परिवार के सदस्य उसकी तलाश कर रहे थे।’

अधिकारियों ने बताया कि अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच अभी जारी है और जांच पूरी होने पर पूरक आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। आगे की जांच की जा रही है।

भाषा नोमान नोमान पवनेश

पवनेश


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