प्रधानमंत्री ने अपने काफिले के वाहनों की संख्या कम की, कई मुख्यमंत्रियों ने भी अमल किया

प्रधानमंत्री ने अपने काफिले के वाहनों की संख्या कम की, कई मुख्यमंत्रियों ने भी अमल किया

प्रधानमंत्री ने अपने काफिले के वाहनों की संख्या कम की, कई मुख्यमंत्रियों ने भी अमल किया
Modified Date: May 13, 2026 / 04:17 pm IST
Published Date: May 13, 2026 4:17 pm IST

नयी दिल्ली, 13 मई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईंधन से चलने वाले वाहनों के उपयोग में कमी लाने और मितव्ययिता उपाय अपनाने की अपील करने के कुछ दिन बाद अपने काफिले में शामिल वाहनों की संख्या काफी कम कर दी है।

प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद कई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी इसी तरह का कदम उठाया है और अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या कम कर दी है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री की हालिया घरेलू यात्राओं के दौरान उनके काफिले में शामिल वाहनों की संख्या कम की गई है।

हालांकि, विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) के प्रोटोकॉल के अनुसार आवश्यक सुरक्षा प्रबंधों को बरकरार रखा गया है।

सूत्रों के अनुसार, हैदराबाद में रविवार को मितव्ययिता उपायों के संबंध में दिए गए प्रधानमंत्री के भाषण के तुरंत बाद गुजरात और असम में उनके काफिले में कारों की संख्या को कम कर दिया गया।

सूत्रों ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री ने जहां संभव हो, बिना नए वाहन खरीदे अपने काफिले में इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करने के निर्देश दिए हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने और राज्य के मंत्रियों के काफिले में चलने वाले वाहनों की संख्या तत्काल आधी करने का निर्देश दिया है। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया है कि ईंधन की खपत कम करें और वैश्विक हालात को देखते हुए सोने की अनावश्यक खरीद से बचें।

उन्होंने मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक तथा विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिवों के साथ बैठक में निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिले में तत्काल 50 प्रतिशत तक कमी की जाए।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटा दी।

सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री यादव ने मंत्रिपरिषद के सदस्यों से राष्ट्रीय हित में पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की अपील की और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री के काफिले में अब पहले के 13 वाहनों की तुलना में केवल आठ वाहन शामिल होंगे।

अधिकारी ने बताया कि उनके दौरों के दौरान वाहन रैलियां भी आयोजित नहीं की जाएंगी। सभी मंत्री अपनी यात्राओं के दौरान न्यूनतम वाहनों का उपयोग करेंगे।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी मंत्रियों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सरकारी वाहनों की संख्या में कमी लाने का निर्देश दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं सभी दिल्लीवासियों से आग्रह करती हूं कि वे भी प्रधानमंत्री जी के इस आह्वान का पालन करते हुए ऊर्जा संरक्षण के इस राष्ट्रीय प्रयास में सहभागी बनें।’’

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उनके काफिले में वाहनों की संख्या कम से कम रखने का निर्देश दिया है, जिसके बाद बुधवार को उनके काफिले में सिर्फ पांच वाहन दिखाई दिए।

आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार शर्मा ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या न्यूनतम रखने का निर्देश दिया है और अधिकारियों को अनावश्यक वाहनों का उपयोग न करने को कहा गया है।

महाराष्ट्र सरकार ने सभी मंत्रियों को निर्देश दिया है कि आधिकारिक यात्रा के लिए विमान का उपयोग करने से पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अनुमति ली जाए।

गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने घोषणा की कि वह गुजरात में हेलीकॉप्टर और विमानों से यात्रा करने के बजाय ट्रेनों, राज्य परिवहन की बसों और सार्वजनिक परिवहन के संसाधनों से यात्रा करेंगे और ईंधन की बचत के लिए उनके सरकारी वाहनों के काफिले को भी छोटा किया जाएगा।

गुजरात के उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने प्रधानमंत्री की अपील के बाद अपनी अमेरिका की प्रस्तावित यात्रा रद्द कर दी है।

बिहार के उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने ऐलान किया कि उन्होंने अपने काफिले के वाहनों की संख्या स्वयं कम करके आधी कर दी है और जरूरी होने पर ही आधिकारिक यात्रा करेंगे।

बिहार की दो अन्य मंत्रियों- लेशी सिंह और शीला मंडल ने भी घोषणा की है कि वे व्यक्तिगत रूप से मितव्ययिता के कदम उठाएंगी।

पश्चिम एशिया संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को हैदराबाद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तेलंगाना इकाई द्वारा आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए मितव्ययिता अपनाने पर जोर दिया था।

प्रधानमंत्री ने पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने, शहरों में मेट्रो रेल सेवाओं का उपयोग करने, कार पूलिंग अपनाने, इलेक्ट्रिक वाहनों के अधिक इस्तेमाल, पार्सल ढुलाई के लिए रेलवे सेवाओं का उपयोग करने और ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर से काम करने) को बढ़ावा देने का सुझाव दिया था।

भाषा वैभव नरेश

नरेश


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