नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने हरियाणा के गुरुग्राम में तीन साल की बच्ची से बलात्कार के मामले में राज्य पुलिस के रवैये को ‘‘शर्मनाक’’ और ‘‘असंवेदनशील’’ बताते हुए बुधवार को इसकी निंदा की तथा इस घटना की निष्पक्ष जांच के लिए महिला आईपीएस अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम का गठन किया।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने हरियाणा सरकार को तत्काल विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन करने का निर्देश दिया और गुरुग्राम पुलिस को मामले के रिकॉर्ड जांच समिति को सौंपने के निर्देश दिए।
पीठ ने हरियाणा पुलिस को इस बात के लिए फटकार लगाई कि उसने पॉक्सो (यौन अपराध से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के तहत दर्ज प्राथमिकी में गंभीर धारा लगाने की बजाय हल्की धारा लगाकर अपराध को कमतर दिखाने की कोशिश की।
न्यायालय ने बच्ची के बयान पर अपना पक्ष पूरी तरह से बदलने के लिए एक निजी अस्पताल की डॉक्टर को भी फटकार लगाई और कहा, ‘‘एक डॉक्टर का ऐसा करना शर्मनाक है।’’
शीर्ष अदालत ने गुरुग्राम पुलिस के अधिकारियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर पूछा कि मामले में लापरवाही से जांच के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।
शीर्ष अदालत ने पुलिस के रवैये को ‘‘शर्मनाक’’ और ‘‘असंवेदनशील’’ बताते हुए कहा, ‘‘पुलिस पीड़ित के घर क्यों नहीं जा सकती? क्या वे राजा हैं? जो गया भी था, उसे भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार कर लिया गया।’’
पीठ ने गुरुग्राम बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को भी ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया कि उन्हें क्यों नहीं हटाया जाना चाहिए।
पीठ ने कहा, ‘‘पांच फरवरी की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि सीडब्ल्यूसी सदस्यों के आचरण ने उत्पीड़न को और बढ़ा दिया। आयुक्त से लेकर उप-निरीक्षक तक, पूरे पुलिस बल ने यह साबित करने की हरसंभव कोशिश की कि बच्ची के पास कोई सबूत नहीं है और माता-पिता ने कोई मामला नहीं बनाया है। इसमें कोई संदेह नहीं कि पॉक्सो की धारा छह के तहत अपराध को स्पष्ट रूप से अंजाम दिया गया है।’’
इसके बाद शीर्ष अदालत ने गुरुग्राम के जिला न्यायाधीश को निर्देश दिया कि वह इस मामले को गुरुग्राम में पॉक्सो अदालत की अध्यक्षता करने वाली एक वरिष्ठ महिला न्यायिक अधिकारी को सौंप दें।
पुलिस ने बताया था कि सेक्टर 54 स्थित एक सोसाइटी में तीन साल की बच्ची से दो महिला घरेलू सहायिकाओं और उनके एक पुरुष साथी ने लगभग दो महीने तक कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया था।
उन्होंने बताया कि बच्चे के माता-पिता द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद चार फरवरी को सेक्टर 53 थाने में भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
पुलिस के अनुसार, यह घटना दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के बीच हुई थी, लेकिन लड़की द्वारा अपनी आपबीती अपनी मां को बताने के बाद ही माता-पिता ने पुलिस को मामले की सूचना दी।
भाषा सुरभि सुरेश
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