नजफगढ़ नाले में हजारों मरी हुई मछलियां दिखीं :सामाजिक कार्यकर्ता
नजफगढ़ नाले में हजारों मरी हुई मछलियां दिखीं :सामाजिक कार्यकर्ता
नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में एक सामाजिक कार्यकर्ता ने दावा किया कि पिछले कुछ दिनों से नजफगढ़ नाले में हजारों मरी हुई मछलियां तैरती हुई देखी गई हैं।
उन्होंने इसके संभावित कारण के रूप में अत्यधिक मात्रा में अनुपचारित आवासीय अपशिष्ट और औद्योगिक कचरे के प्रवाह की ओर इशारा किया।
यमुना नदी से जुड़े मुद्दों पर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और ‘साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपुल’ (एसएएनडीआरपी) के सदस्य भीम सिंह रावत ने बताया कि यह मामला दिल्ली-हरियाणा सीमा पर स्थित रावता गांव के पास का है।
उन्होंने कहा, ‘‘बड़ी संख्या में मछलियों के मारे जाने का कारण अनुपचारित आवासीय अपशिष्टों और औद्योगिक कचरे का अत्यधिक प्रवाह हो सकता है।’’
रावत ने कहा कि तापमान में वृद्धि के साथ-साथ इन सभी कारणों से ‘डीओ’ (विलेय ऑक्सीजन) का स्तर गिर गया होगा, जिससे मछलियों की मौत हो गई।
विलेय ऑक्सीजन, पानी में घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा है, जो जलीय जीवों (मछलियों, पौधों) के जीवित रहने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
दिल्ली के सबसे प्रदूषित नालों में शुमार नजफगढ़ नाला सीधा यमुना में गिरता है, जिससे इसके प्रदूषण स्तर को लेकर चिंताएं और बढ़ जाती हैं।
रावत ने कहा कि यमुना के प्रमुख स्थानों पर पहले भी इसी तरह की घटनाएं देखी गई हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन विभाग के प्रमुख राधेश्याम शर्मा ने कहा कि मछलियों को पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के जैव-सूचक के रूप में लिया जा सकता है।
शर्मा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘बड़ी संख्या में मछलियों का मरना पर्यावरण पर अत्यधिक दबाव का संकेत हो सकता है। नजफगढ़ नाले में पहले से ही प्रदूषण का स्तर बहुत अधिक है, हालांकि मिश्रण की विषाक्तता से यह समस्या और भी बढ़ गई है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कोई विशेष प्रदूषक अपेक्षाकृत कम मात्रा में मौजूद हो सकता है और अगर वह अकेला मौजूद हो तो भी कोई समस्या नहीं होगी। हालांकि, जब कई प्रदूषक मौजूद होते हैं, तो वे एक दूसरे के साथ रासायनिक रूप से प्रतिक्रिया कर सकते हैं और मिश्रण विषाक्तता का कारण बन सकते हैं।’’
भाषा शफीक जितेंद्र
जितेंद्र

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