यौन उत्पीड़न मामलों के त्वरित निपटारे की मांग, कोहिमा में हजारों लोग सड़कों पर उतरे
यौन उत्पीड़न मामलों के त्वरित निपटारे की मांग, कोहिमा में हजारों लोग सड़कों पर उतरे
कोहिमा, 19 जून (भाषा) यौन उत्पीड़न मामलों के निपटारे में तेजी और पीड़िताओं को शीघ्र न्याय दिलाने की मांग को लेकर हजारों महिलाओं ने पुरुषों, युवा संगठनों के प्रतिनिधियों और गैर-नगा समुदायों के सदस्यों के साथ शुक्रवार को भारी बारिश के बीच यहां रैली निकाली।
कोहिमा की जनजातीय महिला संस्थाओं (टीडब्ल्यूबीके) द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन में शामिल लोग ओल्ड एमएलए हॉस्टल जंक्शन पर एकत्र हुए और वहां से लोक भवन तक मार्च निकाला। इसके बाद उन्होंने गौहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन निलंबित आईएएस अधिकारी रेनी विल्फ्रेड से जुड़े यौन उत्पीड़न के उस मामले में कार्यवाही में देरी पर केंद्रित रहा जो 2021 से लंबित है। प्रदर्शनकारियों ने राज्य में हाल में सामने आए दुष्कर्म और यौन हिंसा के मामलों का भी उल्लेख किया।
‘न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के समान है’, ‘यौन उत्पीड़न करने वालों की जगह जेल में, दफ्तरों में नहीं’ और ‘आपका प्रभाव सच को दबा नहीं सकता’ जैसे नारों वाली तख्तियां लेकर प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कानूनी प्रक्रियाओं का सहारा लेकर मुकदमे की कार्यवाही में देरी की जा रही है, जिससे पीड़िताओं को न्याय नहीं मिल पा रहा है।
सभा को संबोधित करते हुए अंगामी महिला संगठन की अध्यक्ष और रैली आयोजन समिति की संयोजक नेइथोनो आर सोथु ने कहा कि न्याय की सामूहिक लड़ाई में बारिश ‘‘आशीर्वाद’’ का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि पीड़िताओं को न्याय मिलने और दोषियों को जवाबदेह ठहराए जाने तक महिलाएं एकजुट रहेंगी।
रैली को कई नागरिक समाज संगठनों, जनजातीय निकायों, छात्र समूहों और युवा संगठनों का समर्थन मिला। इनमें नगालैंड निवेश एवं विकास प्राधिकरण (आईडीएएन), नगा स्टूडेंट्स फेडरेशन, कोहिमा ओ तेलोंगजेम, अंगामी यूथ ऑर्गनाइजेशन, कोहिमा लोथा होहो तथा खियामनियुंगन और यिमखियुंग संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।
ज्ञापन में टीडब्ल्यूबीके ने विल्फ्रेड से जुड़े मामले में कार्यवाही में देरी पर चिंता व्यक्त की। संगठन ने आरोप लगाया कि बार-बार स्थगन दिए जाने से न्याय प्रणाली के प्रति लोगों का विश्वास प्रभावित हो रहा है और अपराधियों का मनोबल बढ़ रहा है।
ज्ञापन में कहा गया है कि व्यक्ति पर नोकलाक के उपायुक्त के रूप में कार्यरत रहने के दौरान दो नाबालिग लड़कियों से छेड़छाड़ करने का आरोप है, जिसके बाद उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
ज्ञापन में कहा गया कि पॉक्सो अधिनियम में ऐसे मामलों के शीघ्र निस्तारण का प्रावधान होने के बावजूद करीब पांच वर्ष बाद भी मुकदमे का निपटारा नहीं हो पाया है।
महिला संगठनों ने दो अप्रैल, 2025 को दर्ज एक अन्य प्राथमिकी का भी उल्लेख किया, जिसमें आरोपी पर संयुक्त सचिव के रूप में कार्यरत रहने के दौरान महिला कर्मचारियों का यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया गया है।
उन्होंने दावा किया कि शिकायत दर्ज कराने वाले कई संविदा कर्मचारियों की नौकरियां चली गईं, जबकि आरोपी विभिन्न कानूनी उपायों का सहारा लेता रहा जिसके कारण मुकदमे की कार्यवाही में बार-बार देरी हुई।
ज्ञापन के अनुसार, आरोपी ने प्राथमिकी को गौहाटी उच्च न्यायालय और बाद में उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। इसमें आरोप लगाया गया कि इसके बाद उच्च न्यायालय में दायर पुनर्विचार याचिका के कारण साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया टल गई, जो पहले नौ जून को निर्धारित थी और बाद में 14 जुलाई तक स्थगित कर दी गई।
प्रदर्शनकारी संगठनों ने तीन सूत्री मांगपत्र सौंपते हुए मुकदमों की कार्यवाही में और देरी नहीं करने, निष्पक्ष तथा समयबद्ध तरीके से सुनवाई, अंतिम फैसला आने तक आरोपी का निलंबन जारी रखने तथा दोषी ठहराए जाने पर उसे सरकारी सेवा और सार्वजनिक पदों के लिए स्थायी रूप से अयोग्य घोषित करने की मांग की।
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर चिंता जताते हुए ज्ञापन में हाल के कई मामलों का उल्लेख किया गया। महिला संगठनों ने इन घटनाओं की निंदा करते हुए दोषियों को कठोर दंड देने और सभी लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण करने की मांग की।
इसमें न्यायपालिका से शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने का आग्रह भी किया गया।
भाषा राखी अविनाश
अविनाश

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