ओडिशा के पुरी में रथ यात्रा के जश्न के बीच हज़ारों लोग ‘हेरा पंचमी’ अनुष्ठान के साक्षी बने
ओडिशा के पुरी में रथ यात्रा के जश्न के बीच हज़ारों लोग 'हेरा पंचमी' अनुष्ठान के साक्षी बने
पुरी, 20 जुलाई (भाषा) पुरी में सोमवार को हजारों श्रद्धालु गुंडिचा मंदिर पहुंचे और वार्षिक रथ यात्रा के पांचवें दिन आयोजित होने वाले ‘हेरा पंचमी’ अनुष्ठान के साक्षी बने। यह रस्म भगवान जगन्नाथ और देवी महालक्ष्मी के बीच दिव्य प्रेम और दांपत्य नोकझोंक का प्रतीक मानी जाती है।
रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ अपने भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ नौ दिनों के प्रवास के लिए गुंडिचा मंदिर चले जाते हैं, लेकिन देवी महालक्ष्मी उनके साथ नहीं जातीं। इसी को लेकर देवी के नाराजगी जताने के प्रतीक के रूप में हेरा पंचमी का आयोजन किया जाता है।
परंपरा के अनुसार, देवी महालक्ष्मी को एक भव्य पालकी यात्रा के जरिए जगन्नाथ मंदिर से करीब 2.6 किलोमीटर दूर स्थित गुंडिचा मंदिर ले जाया जाता है।
जगन्नाथ संस्कृति के शोधकर्ता भास्कर मिश्रा ने बताया कि मान्यता के अनुसार, देवी लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष रथ के एक हिस्से को प्रतीकात्मक रूप से क्षतिग्रस्त करती हैं, क्योंकि भगवान उन्हें साथ लेकर रथ यात्रा पर नहीं गए थे। यह उनकी नाराजगी व्यक्त करने की रस्म है।
परंपरा के मुताबिक, देवी महालक्ष्मी गुंडिचा मंदिर पहुंचती हैं, लेकिन भगवान जगन्नाथ से उनकी मुलाकात नहीं हो पाती क्योंकि भगवान अपने जन्मस्थान पर बचपन के साथियों से मिलने में व्यस्त माने जाते हैं। गुंडिचा मंदिर को तीनों देवी-देवताओं का जन्मस्थान माना जाता है।
भाषा
राखी रंजन
रंजन

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