दुधवा में बाघिन की मौत की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी गठित, एनटीसीए ने भी मांगी रिपोर्ट

दुधवा में बाघिन की मौत की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी गठित, एनटीसीए ने भी मांगी रिपोर्ट

दुधवा में बाघिन की मौत की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी गठित, एनटीसीए ने भी मांगी रिपोर्ट
Modified Date: June 29, 2026 / 10:13 am IST
Published Date: June 29, 2026 10:13 am IST

लखीमपुर खीरी (उप्र), 29 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के वन मंत्री अरुण कुमार सक्सेना ने सोमवार को कहा कि लखीमपुर खीरी जिले के दुधवा बफर जोन की मझगईं रेंज में 23 जून को हुई बाघिन की मौत की जांच अब वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) करेगी।

सक्सेना ने कहा कि एसआईटी की अगुवाई जाने-माने वन्यजीव विशेषज्ञ तथा पीसीसीएफ (प्लानिंग, रिसर्च एंड ट्रेनिंग) ललित कुमार वर्मा करेंगे। टीम में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ए.पी. सिंह और वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला को भी शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘एसआईटी जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। यदि जांच में कोई कमी या गड़बड़ी सामने आती है तो सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी।’’

इस बीच, ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की निगरानी करने वाली केंद्रीय संस्था राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने भी बाघिन की मौत की परिस्थितियों पर राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

एनटीसीए के सदस्य सचिव संजय कुमार पाठक ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमने राज्य सरकार से इस मामले की वास्तविक स्थिति और एनटीसीए की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के पालन की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी है।’’

दुधवा बाघ अभयारण्य (डीटीआर) के अधिकारियों के अनुसार, इस बाघिन ने मझगईं रेंज के रामनगर क्षेत्र में 14 जून को किसान मातादीन (60) और 15 जून को महिला कोकिला (40) की जान ले ली थी। इसके बाद एक सप्ताह तक चले अभियान के बाद 23 जून की सुबह उसे बेहोश कर पकड़ लिया गया था।

दुधवा बफर जोन के अधिकारियों ने बताया कि पिंजरे में बेहोशी का असर खत्म होने के कुछ ही मिनट बाद बाघिन को होश आ गया था। मझगईं वन रेंज मुख्यालय में हुई चिकित्सकीय जांच में पुष्टि हुई कि वह स्वस्थ हो गई और उसे जंगल में छोड़ा जा सकता है।

दुधवा बफर जोन की उप निदेशक कीर्ति चौधरी के अनुसार, एनटीसीए की सभी दिशानिर्देशों और मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का पालन किया गया था।

उन्होंने बताया कि बाघिन का व्यवहार लगभग पूरे दिन सामान्य रहा, लेकिन देर शाम वह अचानक गिर पड़ी और उसकी मौत हो गई।

डीटीआर के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. एच. राजमोहन ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि मौत के सही कारण का पता लगाने के लिए मृत बाघिन को बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) ले जाया गया।

पोस्टमार्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट में आईवीआरआई ने ‘हेमोरेजिक गैस्ट्राइटिस’ और गंभीर परजीवी संक्रमण को मौत का संभावित कारण बताया है।

उन्होंने कहा कि हिस्टोपैथोलॉजिकल और टॉक्सिकोलॉजिकल जांच की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।

आईवीआरआई ने अत्यधिक गर्मी से उत्पन्न हाइपरथर्मिया और पकड़े जाने के दौरान हुए तनाव को भी बाघिन की अचानक मौत के संभावित कारणों में शामिल किया है।

भाषा सं आनन्द वैभव खारी

खारी


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