उत्तर प्रदेश में हमले करने की अलकायदा की साजिश में शामिल होने के जुर्म में तीन को सजा सुनायी गयी

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उत्तर प्रदेश में हमले करने की अलकायदा की साजिश में शामिल होने के जुर्म में तीन को सजा सुनायी गयी

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  • Publish Date - April 14, 2026 / 03:51 PM IST,
    Updated On - April 14, 2026 / 03:51 PM IST

नयी दिल्ली, 14 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की अदालत ने उत्तर प्रदेश में हमले करने की अल-कायदा की आतंकी साजिश में शामिल होने के जुर्म में तीन लोगों को सजा सुनाई है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि तीनों की पहचान लखनऊ के मुसीरुद्दीन उर्फ ​​राजू और मिन्हाज अहमद उर्फ ​​मिन्हाज तथा जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के तौहीद अहमद शाह उर्फ ​​सोबू शाह के रूप में हुई है।

अधिकारियों ने बताया कि लखनऊ की विशेष (एनआईए) अदालत ने सोमवार को तीनों को पांच साल के कठोर कारावास से लेकर उम्रकैद तक की अलग-अलग सजाएं सुनाईं।

उन्होंने बताया कि इन अपराधियों पर 20,000 रुपये तक का जुर्माना भी लगाया गया है।

इस मामले में तीन अन्य आरोपियों– शकील, मोहम्मद मुस्तकीम और मोहम्मद मोईद (सभी लखनऊ निवासी) को पहले ही शस्त्र अधिनियम के तहत दोषी ठहराया जा चुका है, क्योंकि उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था।

एनआईए ने 2022 में इस मामले में इन सभी छह लोगों के खिलाफ दो आरोपपत्र दाखिल किये थे।

जुलाई 2021 में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन अल-कायदा के सदस्यों– मुशीरुद्दीन और मिन्हाज की गिरफ्तारी के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने मूल रूप से यह मामला दर्ज किया था। इससे पहले उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) ने दोनों को गिरफ्तार किया था।

एनआईए के एक बयान में कहा गया है कि दोनों आरोपी लखनऊ में ‘अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट ’(एक्यूआईएस) के एक मॉड्यूल के रूप में अंसार गजवातुल हिंद (एजीएच) को खड़ा करने के लिए युवाओं को कट्टरपंथ का पाठ पढ़ाने तथा उनकी भर्ती करने में शामिल पाए गए थे।

बयान में कहा गया है कि इस साजिश का मकसद 2021 में स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत राज्य के विभिन्न शहरों में आतंकवादी कृत्यों को अंजाम देना था।

एनआईए ने मामले को अपने हाथ में लेने के बाद पाया कि मिन्हाज को तौहीद और एक अन्य आरोपी आदिल नबी तेली उर्फ ​​मूसा ने कट्टरपंथी बनाया था।

बयान में कहा गया है कि इन तीनों व्यक्तियों ने मिलकर प्रतिबंधित एजीएच के लिए सदस्यों की भर्ती करने की साजिश रची थी, ताकि वे आतंकवादी कृत्यों को अंजाम दे सकें।

आतंकवाद विरोधी एजेंसी की जांच में यह भी पता चला कि मिन्हाज ने मुसीरुद्दीन को भी इस साजिश में शामिल किया था और यहां तक ​​कि उसने मिन्हाज के कहने पर बैयत (निष्ठा की शपथ) भी ली थी।

एनआईए ने बताया कि इसके बाद, मुसीरुद्दीन और मिन्हाज ने शकील, मुस्तकीम और मोईद की मदद से भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की आतंकी साजिश के तहत हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री प्राप्त की थी।

जांच के दौरान मूसा को प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के विस्तारित संगठन टीआरएफ से संबद्ध घोषित आतंकवादी पाया गया।

जांच में पता चला कि मूसा को तौहीद के माध्यम से मिन्हाज से धनराशि प्राप्त हुई थी।

बयान में कहा गया है कि मूसा मार्च 2022 में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था। एनआईए ने अगस्त 2022 में उसके खिलाफ संशोधित आरोप पत्र दाखिल किया था।

भाषा राजकुमार वैभव

वैभव