विस्तारित सुविधाओं से आदिवासी छात्र भी इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढा़ई कर पा रहे हैं: पटेल
विस्तारित सुविधाओं से आदिवासी छात्र भी इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढा़ई कर पा रहे हैं: पटेल
दाहोद, 24 जून (भाषा) गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बुधवार को कहा कि आदिवासी इलाकों में विज्ञान, अभियांत्रिकी और चिकित्सा शिक्षा सुविधाओं के विस्तार से दूर-दराज के इलाकों में छात्र ऐसे पेशेवर करियर अपना पा रहे हैं, जो पहले उनकी पहुंच से दूर थे।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक पटेल दाहोद ज़िले में राज्य के स्कूल नामांकन अभियान (शाला प्रवेशोत्सव) के दूसरे दिन एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘पहले विज्ञान की पढ़ाई के लिए सुविधाएं सीमित थीं, लेकिन अब जिला स्तर पर अभियांत्रिकी और चिकित्सा संस्थान उपलब्ध हैं, जिससे आदिवासी छात्र चिकित्सक और अभियंता बनने का अपना सपना पूरा कर पा रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि सरकार ने उच्च शिक्षा, खासकर विज्ञान के क्षेत्र में, को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं।
पटेल ने कहा कि आदिवासी छात्रों के लिए सालाना आय सीमा 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर छह लाख रुपये कर दी गई है, ताकि वे छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ उठा सकें।
उन्होंने कहा, ‘‘नमो लक्ष्मी योजना के तहत, नवीं से 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़कियों को 50,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता मिलती है। नमो सरस्वती योजना के तहत 11वीं और 12वीं कक्षा में विज्ञान की पढ़ाई करने वाले छात्रों को 50,000 रुपये तक की सहायता मिलती है।’’
पटेल ने कहा कि विज्ञान संकाय में 11वीं और 12वीं कक्षा की पढ़ाई करने वाली लड़कियां अलग-अलग सरकारी योजनाओं से 75,000 रुपये तक की सहायता प्राप्त कर सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने 24वें स्कूल नामांकन अभियान के दूसरे दिन दाहोद के मोती खराज, राहडुंगरी और गंगारडा गांवों के विद्यालयों में 300 से अधिक बच्चों का दाखिला कराया।
पटेल ने कहा, ‘‘राज्य सरकार ने आधुनिक सुविधाओं और अच्छी शिक्षा के जरिए छात्रों के उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित किया है। अब विद्यालयों में स्मार्ट कक्षा, कंप्यूटर प्रयोगशाला, इंटरनेट सेवा और आधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला जैसी सुविधाएं मौजूद हैं।’’ उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं की वजह से ग्रामीण और दूर-दराज़ के इलाकों के छात्र भी आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर पा रहे हैं।
पटेल ने कहा कि अधिकारी और शिक्षा विभाग के कर्मचारी घर-घर जाकर उन बच्चों की चुनौतियों को समझ रहे हैं जो बीच में ही पढ़ाई छोड़ रहे हैं, और उन्हें स्कूल लौटने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बच्चों के अभिभावकों से अपील की कि वे नियमित रूप से स्कूल जाकर और शिक्षकों के साथ बच्चों की प्रगति पर चर्चा करके उनके भविष्य में सक्रिय रूप से शामिल हों।
भाषा धीरज प्रशांत
प्रशांत

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