तृणमूल संकट जारी: बागी नेताओं की ओम बिरला के साथ बैठक से पहले सायोनी और माला रॉय दिल्ली पहुंचीं

तृणमूल संकट जारी: बागी नेताओं की ओम बिरला के साथ बैठक से पहले सायोनी और माला रॉय दिल्ली पहुंचीं

तृणमूल संकट जारी: बागी नेताओं की ओम बिरला के साथ बैठक से पहले सायोनी और माला रॉय दिल्ली पहुंचीं
Modified Date: June 14, 2026 / 04:20 pm IST
Published Date: June 14, 2026 4:20 pm IST

नयी दिल्ली, 14 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों की लोकसभा अध्यक्ष के साथ ‘‘मूल तृणमूल’’ पर अपना दावा पेश करने के लिए होने वाली बैठक से पहले, रविवार को सांसद सायोनी घोष और माला रॉय दिल्ली पहुंचीं।

हालांकि, तृणमूल ने दोहराया है कि अलग संसदीय समूह बनाने की अनुमति देने वाला कोई कानून नहीं है।

सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसदों के रविवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ बैठक करने की भी संभावना है।

दिल्ली हवाईअड्डे पर रॉय और घोष, दोनों ने ही मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया।

घोष ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों को जवाब दूंगी, आपको नहीं।’’

इस घटनाक्रम से एक दिन पहले ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक माने जाने वाले वरिष्ठ तृणमूल नेता एवं सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री अमित शाह और भूपेंद्र यादव से मुलाकात के बाद बागी खेमे का दामन थाम लिया।

बढ़ती उथल-पुथल के बीच, तृणमूल ने संगठन में फिर से फेरबदल किया और घोष, रॉय तथा बंद्योपाध्याय को पार्टी के अहम पदों से हटा दिया।

अर्नब बनर्जी को घोष की जगह तृणमूल युवा कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया, जबकि कालीगंज की विधायक अलीफा अहमद ने रॉय की जगह पार्टी की महिला शाखा की अध्यक्ष का पद संभाला। एक और अहम बदलाव में, तृणमूल नेता कुणाल घोष को बंद्योपाध्याय की जगह पार्टी के उत्तरी कोलकाता संगठनात्मक जिले का अध्यक्ष बनाया गया।

सायोनी घोष और माला रॉय बागी गुट के साथ हैं, इस गुट का दावा है कि उसे तृणमूल के 28 लोकसभा सदस्यों में से 20 का समर्थन हासिल है।

हालांकि, तृणमूल ने बागी नेताओं के प्रयासों को खारिज कर दिया और कहा कि दलबदल-रोधी कानून संसद के भीतर एक अलग गुट बनाने की इजाजत नहीं देता है।

तृणमूल की राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष ने रविवार को कहा कि अलग गुट बनाने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। उन्होंने दावा किया कि सांसदों को अयोग्य ठहराया जा सकता है, जब तक कि उनकी मूल राजनीतिक पार्टी दसवीं अनुसूची के प्रावधानों के तहत किसी दूसरी पार्टी में विलय न कर ले।

भाषा शफीक सुरेश

सुरेश


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