तृणमूल सरकार की दशा जर्जर, गिनती के दिन शेष बचे हैं: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष

तृणमूल सरकार की दशा जर्जर, गिनती के दिन शेष बचे हैं: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष

तृणमूल सरकार की दशा जर्जर, गिनती के दिन शेष बचे हैं: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष
Modified Date: April 18, 2026 / 06:10 pm IST
Published Date: April 18, 2026 6:10 pm IST

कोलकाता, 18 अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम बंगाल इकाई के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने शनिवार को राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तंज कसते हुए उसे बीते जमाने की निशानी करार दिया और कहा कि इस सरकार के केवल गिनती के दिन शेष हैं।

तृणमूल शासन पर लोकतंत्र को कुचलने और कानून-व्यवस्था को ध्वस्त करने का आरोप लगाते हुए भट्टाचार्य ने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक हिंसा भयावह स्तर पर पहुंच गई है, जबकि पुलिस ने इसपर आंखें मूंद रखी है।

उन्होंने कहा, ‘‘राज्य की जनता लोकतंत्र की बहाली चाहती है। पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से नदारद है, जहां 2021 के चुनाव के बाद तृणमूल ने भाजपा के 253 पदाधिकारियों की हत्या कर दी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सैकड़ों महिलाओं से बलात्कार किए गए और उन्हें यातनाएं दी गईं। तृणमूल के ‘गुंडों’ द्वारा मचाई गई हिंसा लोकतंत्र पर हमला है।’’

उन्होंने सभा को याद दिलाया कि 2011 में ममता बनर्जी ने ‘लोकतंत्र की बहाली’ के नारे के साथ वाम मोर्चे के 34 वर्ष के शासन का अंत किया था।

उन्होंने कहा, “लेकिन इसके तुरंत बाद, उनकी पार्टी ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की गुंडागर्दी और बाहुबल को अपना लिया और अगले दो कार्यकाल तक आतंक का राज कायम किया। उन्होंने लोगों और विपक्षी दलों को डराने की कोशिश की, ताकि कोई भी उनके खिलाफ खड़ा न हो सके।’’

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने तृणमूल पर ‘हर बात का राजनीतिकरण’ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ताधारी पार्टी हर तरह से राज्यपाल के पद का अपमान कर रही है।

भाजपा के राज्यसभा सांसद ने कहा, ‘‘यह अभूतपूर्व है कि एक राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति ने राज्यपाल के फोन का जवाब नहीं दिया और कहा कि उन्हें सरकार की मंजूरी चाहिए। यह एक और सबूत है कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र गंभीर खतरे में है।’’

उन्होंने कहा कि तृणमूल के सत्ता में आने के समय पश्चिम बंगाल पर 1.92 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अब बढ़कर सात लाख करोड़ रुपये हो गया है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि तृणमूल के 15 वर्षों के शासनकाल में 1,600 कंपनियां बंद हो गईं, जबकि 6,300 कंपनियों ने अपने मुख्यालय स्थानांतरित कर दिए।

भाषा संतोष सुरेश

सुरेश


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