तृणमूल ने ‘पार्टी विरोधी’ गतिविधियों के आरोप में तीन प्रवक्ताओं को निलंबित किया

तृणमूल ने ‘पार्टी विरोधी’ गतिविधियों के आरोप में तीन प्रवक्ताओं को निलंबित किया

तृणमूल ने ‘पार्टी विरोधी’ गतिविधियों के आरोप में तीन प्रवक्ताओं को निलंबित किया
Modified Date: May 9, 2026 / 10:31 pm IST
Published Date: May 9, 2026 10:31 pm IST

कोलकाता, नौ मई (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी विरोधी टिप्पणी करने के आरोप में शनिवार को पार्टी ने अपने तीन प्रवक्ताओं को छह साल के लिए निलंबित कर दिया।

एक बयान के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस अनुशासन का उल्लंघन करने के आरोप में प्रवक्ता कोहिनूर मजूमदार, रिजू दत्ता और कार्तिक घोष को निलंबित कर दिया गया है।

तृणमूल कांग्रेस ने यह कार्रवाई विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद नेतृत्व और पार्टी की चुनावी रणनीति की आलोचना करने वाली टिप्पणियों के लिए पांच प्रवक्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करने के कुछ दिनों बाद की है।

पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा की 293 सीट पर हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 207 सीट पर जीत दर्ज की है जबकि 15 साल से सत्ता में रही तृणमूल 80 सीटों पर सिमट गई।

तृणमूल सांसद डेरेक ओब्रायन ने ये नोटिस जारी किये थे, जो पार्टी की अनुशासनात्मक समिति के सदस्य हैं।

तृणमूल ने तीन प्रवक्ताओं के निलंबन के अलावा कृष्णेंदु चौधरी और पापिया घोष को भी नोटिस जारी किए गए थे।

पार्टी ने 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा था और पूछा था कि ‘‘पार्टी अनुशासन के उल्लंघन’’ के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए।

तृणमूल कांग्रेस नेताओं के अनुसार, चुनावी हार के बाद कुछ प्रवक्ताओं ने सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व के कामकाज और चुनाव अभियान की रणनीति पर सवाल उठाए थे।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘ये टिप्पणियां सोशल मीडिया के साथ-साथ मीडिया से बातचीत के दौरान भी की गईं।’’

मजूमदार ने संवाददाताओं से कहा था कि तृणमूल नेताओं को अक्सर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से मिलने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था।

मालदा के एक वरिष्ठ नेता चौधरी ने डायमंड हार्बर से लोकसभा सदस्य अभिषेक के कामकाज के तरीके की भी आलोचना की थी।

दत्ता ने इस बीच सोशल मीडिया पोस्ट में चुनाव के बाद की हिंसा को रोकने के लिए भाजपा सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की प्रशंसा करके सबका ध्यान आकर्षित किया।

ओब्रायन और अनुशासनात्मक समिति की सदस्य चंद्रिमा भट्टाचार्य ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

भाषा धीरज शफीक

शफीक


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