एनएमसी के मान्यता वापस लेने के बाद वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में अनिश्चितता की स्थिति
एनएमसी के मान्यता वापस लेने के बाद वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में अनिश्चितता की स्थिति
कटरा/जम्मू, आठ जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) द्वारा जम्मू कश्मीर के कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को एमबीबीएस पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए दिये गए अनुमति पत्र को वापस लिये जाने के बाद संस्थान पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।
एनएमसी के चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) ने दो जनवरी को औचक निरीक्षण के बाद ‘‘न्यूनतम मानकों’’ को पूरा करने में विफलता का हवाला दिया, जबकि संकाय सदस्यों और छात्रों का आरोप है कि यह निर्णय शैक्षणिक कमियों के बजाय स्थानीय राजनीतिक दबाव से प्रेरित है।
भाजपा समर्थित दक्षिणपंथी संगठनों के समूह ‘संघर्ष समिति’ द्वारा हफ्तों से किये जा रहे विरोध प्रदर्शन के बाद यह फैसला लिया गया है। समिति कश्मीर के 42 मुस्लिम छात्रों, सात हिंदू छात्रों और एक सिख छात्र के मौजूदा बैच में प्रवेश रद्द करने की मांग कर रही थी।
इन सभी छात्रों ने राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) उत्तीर्ण की थी।
यह समूह कॉलेज पर मौजूदा योग्यता-आधारित सूची प्रणाली को रद्द करने और सभी सीटें केवल हिंदू छात्रों के लिए आरक्षित करने का दबाव बना रहा था।
हालांकि, शिक्षकों ने संस्थान का बचाव करते हुए इसे केंद्र शासित प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में से एक बताया है।
एक वरिष्ठ संकाय सदस्य ने एमएआरबी के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘‘हमने कड़ी मेहनत के बाद अनुमति प्राप्त की। हमारे पास बेहतरीन बुनियादी ढांचा और संकाय सदस्य हैं, और मेडिकल कॉलेज संचालित करने के लिए जो कुछ भी आवश्यक है, वह सब मौजूद है।’’
मंगलवार शाम एमएआरबी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि 2025-26 शैक्षणिक वर्ष के लिए काउंसलिंग के दौरान कॉलेज में प्रवेश पाने वाले सभी छात्रों को केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के सक्षम प्राधिकारी द्वारा अतिरिक्त सीटों के रूप में जम्मू कश्मीर के अन्य चिकित्सा संस्थानों में समायोजित किया जाएगा।
मेडिकल कॉलेज की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।
संकाय सदस्यों ने कहा कि एनएमसी के निष्कर्षों को चुनौती दी जा सकती है और ‘‘सभी जानते हैं कि निरीक्षण और उसके बाद के निर्णय का कारण क्या था, खासकर जम्मू क्षेत्र में उत्पन्न अशांति को देखते हुए।’’
इस फैसले के मानवीय नुकसान को रेखांकित करते हुए, एक अन्य संकाय सदस्य ने कहा कि लगभग 150 लोगों ने सरकारी और निजी क्षेत्रों में अपनी नौकरियां छोड़ दीं और इस संस्थान में शामिल हुए, लेकिन वे सभी अब अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
संस्थान के एक शिक्षक ने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि एनएमसी के आदेश का मतलब यह नहीं है कि संस्थान हमेशा के लिए बंद हो जाएगा। हमें उम्मीद है कि श्राइन बोर्ड कोई निर्णय लेगा और कर्मचारियों और संस्थान के भविष्य की रक्षा करेगा।’’
अनुमति पत्र के लिए दोबारा आवेदन करने के विकल्प का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे समस्या का समाधान नहीं हो सकता।
संकाय सदस्य ने कहा, ‘‘जरूरत इस बात की है कि इस स्थिति को पूरी तरह से टाला जाए और दीर्घकालिक उपाय सुनिश्चित किए जाएं ताकि संस्थान सुचारू रूप से संचालित होता रहे।’’
छात्रों ने भी अनुमति रद्द होने पर दुख व्यक्त किया।
बडगाम की छात्रा बिलकिस ने कहा, ‘‘हमने प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से दाखिला लिया था, और एनएमसी का यह निर्णय हमारे लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि हमने अपने पाठ्यक्रम की शुरुआत में ऐसी किसी घटना की उम्मीद नहीं की थी।’’
भाषा सुभाष मनीषा
मनीषा

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