आधुनिक गर्भनिरोधकों का इस्तेमाल घट रहा है: एनएफएचएस-6
आधुनिक गर्भनिरोधकों का इस्तेमाल घट रहा है: एनएफएचएस-6
(पायल बनर्जी)
नयी दिल्ली, 30 मई (भाषा) भारत में विवाहित महिलाओं के बीच आधुनिक गर्भनिरोधक उपायों के इस्तेमाल में पिछले कुछ वर्षों में मामूली गिरावट आई है जबकि परिवार नियोजन की पारंपरिक विधियों पर निर्भरता में वृद्धि देखी गई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस-6) से यह जानकारी मिली।
सर्वेक्षण के अनुसार परिवार नियोजन की किसी भी आधुनिक विधि का इस्तेमाल करने वाली विवाहित महिलाओं का अनुपात एनएफएचएस-5 (2019-21) में 56.4 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 52.7 प्रतिशत हो गया।
इसी दौरान, पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल 10.3 प्रतिशत से बढ़कर 16.4 प्रतिशत हो गया, जो दंपतियों के बीच गर्भनिरोधक के इस्तेमाल में बदलाव का संकेत देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक गर्भनिरोधक विकल्प न केवल जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए बल्कि मातृ स्वास्थ्य, महिलाओं की स्वायत्तता और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए भी महत्वपूर्ण हैं और पारंपरिक तरीकों पर निर्भरता चिंताजनक है क्योंकि इससे अनचाहे गर्भधारण का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक और पारंपरिक दोनों तरीकों समेत गर्भनिरोधक के समग्र इस्तेमाल में एनएफएचएस-5 में 66.7 प्रतिशत से बढ़कर एनएफएचएस-6 में 69.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे पता चलता है कि अधिक से अधिक दंपति परिवार नियोजन के उपाय अपना रहे हैं, हालांकि उनमें से ज्यादातर लोग नसबंदी, गोलियां और कंडोम जैसे आधुनिक तरीकों से दूर होकर अन्य तरीकों पर अधिक निर्भर हो रहे हैं।
सर्वेक्षण में देश में सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली परिवार नियोजन विधि, महिला नसबंदी में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई, जो 37.9 प्रतिशत से घटकर 36.5 प्रतिशत हो गई। पुरुषों की नसबंदी की दर पिछले सर्वेक्षण के 0.3 प्रतिशत की तुलना में 0.5 प्रतिशत पर बेहद कम बनी रही।
जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि ये निष्कर्ष जागरूकता, परामर्श और आधुनिक गर्भनिरोधक विकल्पों की व्यापक श्रृंखला तक पहुंच को मजबूत करने की आवश्यकता को दर्शाते हैं।
‘पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ की कार्यकारी निदेशक पूनम मुट्रेजा ने कहा कि यह बदलाव परामर्श में कमियों, दुष्प्रभावों को लेकर आशंकाओं, गर्भनिरोधक उपायों की सीमित पहुंच और सामाजिक मानदंडों को दर्शाता है जो गर्भनिरोध का बोझ महिलाओं पर ही डालते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘एनएफएचएस-6 को एक चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए कि केवल पहुंच ही पर्याप्त नहीं है। वर्तमान में विवाहित महिलाओं में आधुनिक गर्भनिरोधक उपायों का इस्तेमाल 56.4 प्रतिशत से घटकर 52.7 प्रतिशत हो गया है, जबकि पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल 10.3 प्रतिशत से बढ़कर 16.4 प्रतिशत हो गया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सशक्तीकरण का अर्थ यह हो सकता है कि सेवाएं उपलब्ध हों, लेकिन स्वायत्तता का अर्थ यह है कि महिलाएं वास्तव में अपने लिए उपयुक्त विधि का चयन और इस्तेमाल कर सकें।’’
वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग में परिवार नियोजन प्रभाग की प्रमुख एवं वरिष्ठ मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यामिनी सरवाल ने कहा कि यदि उचित परामर्श और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं के साथ पारंपरिक तरीकों पर अधिक निर्भरता न हो तो अनचाहे गर्भधारण का खतरा बढ़ सकता है।
डॉ. सरवाल ने कहा, ‘‘आधुनिक गर्भनिरोधक विकल्प न केवल जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए बल्कि मातृ स्वास्थ्य, महिलाओं की स्वायत्तता और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।’’
दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. नीलम सूरी ने कहा कि पारंपरिक परिवार नियोजन उपायों पर बढ़ती निर्भरता चिंताजनक है।
डॉ. सूरी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए ही नहीं, बल्कि मातृ स्वास्थ्य, महिलाओं की स्वायत्तता और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए भी आधुनिक गर्भनिरोधक विकल्प महत्वपूर्ण हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के रूप में, हम अनचाहे गर्भधारण को समाप्त करने के बजाय विश्वसनीय और उपयुक्त गर्भनिरोधक उपायों के इस्तेमाल की पुरजोर अनुशंसा करते हैं, क्योंकि गर्भनिरोधक विकल्प प्रजनन स्वास्थ्य के लिए सबसे सुरक्षित और सबसे प्रभावी तरीका है।’’
एनएफएचएस-6 की ‘फैक्ट शीट’ में गर्भनिरोधक विकल्पों के कारणों को स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया है, लेकिन यह प्रवृत्ति देश के ज्यादातर हिस्सों में महिला शिक्षा के बढ़ते स्तर, इंटरनेट के उपयोग और देर से विवाह के साथ उभरती है।
राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं में इंटरनेट का इस्तेमाल लगभग दोगुना हो गया, जो एनएफएचएस-5 में 33.3 प्रतिशत से बढ़कर एनएफएचएस-6 में 64.3 प्रतिशत हो गया।
आंकड़ों से पता चलता है कि जिन महिलाओं के पास बैंक या बचत खाता है जिसका वे स्वयं उपयोग करती हैं, उनकी संख्या 78.6 प्रतिशत से बढ़कर 89.0 प्रतिशत हो गई है और जिन महिलाओं के पास मोबाइल फोन है, उनकी संख्या 53.9 प्रतिशत से बढ़कर 63.6 प्रतिशत हो गई है।
भाषा
देवेंद्र माधव
माधव

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