उप्र: प्रतिबंधित स्थल पर नमाज पढ़ने के आरोप में दो छात्रों के खिलाफ दर्ज मामला अदालत ने रद्द किया

उप्र: प्रतिबंधित स्थल पर नमाज पढ़ने के आरोप में दो छात्रों के खिलाफ दर्ज मामला अदालत ने रद्द किया

उप्र: प्रतिबंधित स्थल पर नमाज पढ़ने के आरोप में दो छात्रों के खिलाफ दर्ज मामला अदालत ने रद्द किया
Modified Date: February 21, 2026 / 12:59 am IST
Published Date: February 21, 2026 12:59 am IST

प्रयागराज (उप्र), 20 फरवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रतिबंधित स्थान पर नमाज पढ़ने के आरोप में दो छात्रों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया और उन्हें भविष्य में आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की चेतावनी दी है।

न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 143 (गैरकानूनी सभा का सदस्य) और 188 (सरकारी अधिकारियों द्वारा विधिवत जारी आदेश) के तहत दर्ज प्राथमिकी से संबंधित कार्यवाही को रद्द कर दिया।

अदालत ने पाया कि आवेदकों के खिलाफ आपराधिक मामला उचित नहीं था जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं था।

मामले के विवरण के अनुसार, संत कबीर नगर की एक अदालत ने कथित अपराधों का संज्ञान लिया था और मई 2019 में दोनों छात्रों के खिलाफ समन जारी किया था।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि दोनों महज छात्र हैं और उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें केवल अपने धर्म के अनुसार नमाज अदा करने के इरादे से फंसाया गया है।

वकील ने यह भी तर्क दिया कि याचिकाकर्ता नंबर एक उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है और ऐसे ‘मामूली अपराध’ में मुकदमे का जारी रहना उसके भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

राज्य के अतिरिक्त शासकीय वकील ने आपराधिक इतिहास के अभाव को स्वीकार किया, लेकिन तर्क दिया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ स्थानों को नमाज अदा करने के लिए प्रतिबंधित किया गया है।

शासकीय अधिवक्ता ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने जानबूझकर प्रतिबंधित स्थान पर नमाज अदा की और इस प्रकार प्रशासनिक निर्देशों का उल्लंघन किया।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने पाया कि एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश में, प्रत्येक नागरिक को अपने विश्वासों और रीति-रिवाजों का पालन करने का अधिकार है।

हालांकि, न्यायालय ने इस बात पर बल दिया कि विविध समाज में कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के व्यापक हित में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन आवश्यक है।

पीठ ने गौर किया कि दोनों आवेदकों पर मुकदमा चलाना, विशेष रूप से उनके आपराधिक इतिहास के अभाव में, अनुचित था और उनके भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता था।

17 फरवरी के आदेश में अदालत ने केवल दोनों आवेदकों के संबंध में कार्यवाही रद्द की। साथ ही उन्हें चेतावनी दी गई कि भविष्य में धार्मिक क्रिया में शामिल होते समय स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी किसी भी निर्देश या प्रतिबंध का सख्ती से पालन करें।

भाषा सं आनन्द खारी

खारी


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