उप्र : हत्या के मामले में छह आरोपियों की उम्रकैद की सजा बरकरार

उप्र : हत्या के मामले में छह आरोपियों की उम्रकैद की सजा बरकरार

उप्र : हत्या के मामले में छह आरोपियों की उम्रकैद की सजा बरकरार
Modified Date: June 9, 2026 / 10:56 pm IST
Published Date: June 9, 2026 10:56 pm IST

प्रयागराज, नौ जून (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हत्या के 43 वर्ष पुराने एक मामले में छह आरोपियों को सहारनपुर की जिला अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए उनकी आपराधिक अपील खारिज कर दी है।

उच्च न्यायालय ने सहारनपुर की अदालत द्वारा 17 नवंबर 1983 को दिए गए फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि चूंकि सभी छह आरोपी वर्तमान में जेल में हैं, इसलिए वे अपनी शेष सजा पूरी करने के लिए जेल में ही रहेंगे।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार की खंडपीठ ने अपील खारिज करते हुए यह आदेश दिया।

इस मामले के अनुसार, सहारनपुर जिले के हरिद्वार थाना क्षेत्र में इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास) और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने 10 अगस्त 1982 को सतीश कुमार पर चाकू से हमला कर उसकी हत्या कर दी थी। जांच के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया, जिसके बाद मुकदमा चला।

सहारनपुर की अदालत ने सभी सात आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, अपील लंबित रहने के दौरान एक आरोपी राकेश की मृत्यु हो गई। इसके बाद शेष छह आरोपियों—सतीश, शिव कुमार, अशोक, भूपत, विजय और विक्रम की अपील पर सुनवाई जारी रही।

दोषसिद्धि के बाद आरोपियों ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी और उन्हें जमानत मिल गई थी। बाद में अपील की सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ता के अनुपस्थित रहने पर अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी किया था, जिसके बाद आरोपियों को गिरफ्तार कर पुनः जेल भेज दिया गया।

आठ जून को दिए गए अपने निर्णय में उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों से यह स्पष्ट रूप से सिद्ध होता है कि घटना की तिथि और समय पर अपीलकर्ताओं ने मृतक सतीश कुमार को घेर लिया था और घातक हथियार से उस पर हमला किया था।’’

अदालत ने कहा, ‘‘हम पाते हैं कि आरोपी अपीलकर्ताओं की दलीलों में कोई दम नहीं है। इसलिए उनकी अपीलें खारिज किए जाने योग्य हैं।’’

इसके साथ ही अदालत ने सभी आपराधिक अपीलों को खारिज कर दिया और निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा।

भाषा

सं, राजेंद्र रवि कांत


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