आंध्र प्रदेश लोकायुक्त दफ्तर में एक नियुक्ति को चुनौती देने वाले याची उच्च न्यायालय जाएं:शीर्ष अदालत

आंध्र प्रदेश लोकायुक्त दफ्तर में एक नियुक्ति को चुनौती देने वाले याची उच्च न्यायालय जाएं:शीर्ष अदालत

आंध्र प्रदेश लोकायुक्त दफ्तर में एक नियुक्ति को चुनौती देने वाले याची उच्च न्यायालय जाएं:शीर्ष अदालत
Modified Date: July 25, 2026 / 03:08 pm IST
Published Date: July 25, 2026 3:08 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने आंध्र प्रदेश लोकायुक्त कार्यालय में पुट्टा मुरली मोहन रेड्डी की निदेशक (विधि) पद पर नियुक्ति से जुड़ी शिकायतों पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय का रुख करने को कहा।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता ताडीबोइना वंशी कृष्णा से कहा कि वह इस मामले में संबंधित उच्च न्यायालय से संपर्क करें। पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश कानून को भली-भांति समझते हैं।

पीठ ने शुक्रवार के अपने आदेश में कहा, ‘‘चूंकि यह मामला आंध्र प्रदेश में एक सार्वजनिक पद पर नियुक्ति से संबंधित है, इसलिए हम इस याचिका पर विचार करने से इनकार करते हैं और याचिकाकर्ता को संबंधित क्षेत्राधिकार वाले उच्च न्यायालय में जाने की छूट देते हैं।’’

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अंजना प्रकाश ने शीर्ष अदालत से हस्तक्षेप का अनुरोध करते हुए कहा कि नियुक्ति संबंधी आदेश रद्द किया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने 22 सितंबर 2021 और 29 अगस्त 2023 के नियुक्ति आदेशों को रद्द करने तथा आंध्र प्रदेश (कर्नूलु) लोकायुक्त के निदेशक (विधि) पद से पुट्टा मुरली मोहन रेड्डी को हटाने का अनुरोध किया।

याचिका में यह भी अनुरोध किया गया कि 22 सितंबर 2021 से अब तक रेड्डी द्वारा प्राप्त वेतन और अन्य लाभों की वसूली की जाए तथा याचिका के अंतिम निपटारे तक लोकायुक्त कार्यालय उन्हें कोई कार्य न सौंपा जाए।

रेड्डी को पहले लोकायुक्त कार्यालय में उप निदेशक (विधि) नियुक्त किया गया था और बाद में उन्हें निदेशक (विधि) के पद पर पदोन्नत किया गया।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि रेड्डी के पास इस पद के लिए निर्धारित आवश्यक योग्यता (सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश) नहीं है। उनका कहना है कि रेड्डी लिखित परीक्षा और साक्षात्कार दोनों में दो बार असफल रहे थे।

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय ने स्वयं रेड्डी को परीक्षा में दोबारा बैठने का अवसर दिया था, लेकिन दूसरी बार भी वह 16 मार्च 2019 को आयोजित लिखित परीक्षा और छह जून 2019 को साक्षात्कार में पूरी तरह असफल रहे।

कृष्णा ने यह भी दावा किया कि वह रेड्डी के कारण परेशान हैं, क्योंकि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना दोनों उच्च न्यायालय के महापंजीयक उन्हें आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं करा रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों उच्च न्यायालय के महापंजीयक कथित अनियमितताओं को छिपाने के उद्देश्य से जानबूझकर रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करा रहे हैं और यह कहकर जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं कि याचिकाकर्ता इस मामले में तीसरा पक्ष है।

भाषा शोभना राजकुमार

राजकुमार


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