बाराबंकी, 21 मार्च (भाषा) उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में शिया समुदाय के लोगों ने अमेरिका व इजराइल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत के शोक में ईद नहीं मनाई।
नगर क्षेत्र स्थित वक्फ नवाब अमजद अली खान इमामबाड़ा के मुतल्लवी सरवर अली ने बताया कि यहां वक्ताओं ने ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल की सैन्य कार्रवाई को अनुचित करार देते हुए जमकर नारेबाजी की।
उन्होंने बताया कि इस बार ईद पर यहां के शिया परिवारों ने कोई उत्सव नहीं मनाया है और केवल नमाज अदा की गई।
किंतूर गांव निवासी डॉ. रेहान काजमी ने बताया में इस बार यहां शिया समुदाय ने ईद का त्यौहार नहीं मनाया क्योंकि ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद गांव में शोक का माहौल है।
उन्होंने बताया कि किंतूर गांव का ईरान से गहरा ऐतिहासिक संबंध है क्योंकि इस गांव को ईरान के पहले सर्वोच्च नेता आयतुल्ला रुहोल्ला मुसावी खुमैनी का पैतृक निवास स्थान माना जाता है।
काजमी ने बताया कि आयतुल्ला खुमैनी के दादा, सैयद अहमद मुसावी का जन्म इसी गांव में हुआ था।
उन्होंने बताया कि खुमैनी 1830 में धार्मिक शिक्षा के लिए भारत छोड़कर पहले इराक और फिर 1834 में ईरान के खोमेन शहर में बस गए थे।
भारत से अपने जुड़ाव को बनाए रखने के लिए ही उन्होंने अपने नाम के साथ ‘हिंदी’ शब्द जोड़ा था।
काजमी ने बताया कि ईरान में उनके परिवार को आज भी ‘अल-मुसावी अल-हिंदी’ के नाम से जाना जाता है।
भाषा सं राजेंद्र जितेंद्र
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