उत्तराखंड: देहरादून प्रशासन ने ‘नंदा सुनंदा’ पहल के तहत गरीब बालिकाओं को शिक्षा सहायता के चेक सौंपे

उत्तराखंड: देहरादून प्रशासन ने ‘नंदा सुनंदा’ पहल के तहत गरीब बालिकाओं को शिक्षा सहायता के चेक सौंपे

उत्तराखंड: देहरादून प्रशासन ने ‘नंदा सुनंदा’ पहल के तहत गरीब बालिकाओं को शिक्षा सहायता के चेक सौंपे
Modified Date: January 1, 2026 / 08:42 pm IST
Published Date: January 1, 2026 8:42 pm IST

देहरादून, एक जनवरी (भाषा) उत्तराखंड के देहरादून जिला प्रशासन ने ‘नंदा-सुनंदा’ पहल के तहत पांच गरीब जरूरतमंद बालिकाओं को शिक्षा सहायता के लिए कुल 1.55 लाख रुपये के चेक सौंपे। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने यहां जिला कलेक्ट्रेट सभागार में एक कार्यक्रम के दौरान यह चेक वितरित किये।

जिलाधिकारी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “नववर्ष की शुरुआत हम सभी पूजा-अर्चना से करते हैं और ऐसे में वर्ष के पहले दिन जरूरतमंद बालिकाओं की शिक्षा को पुनजीर्वित करने की शुरुआत एक अत्यंत संतोष और पुण्य का कार्य है।”

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उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का निर्देश है कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े लोगों को जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाए और इसके लिए जिलों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं सृजित की जाएं।

जिलाधिकारी ने कहा कि अब तक इस परियोजना के 11 संस्करण किए जा चुके हैं और इनके जरिये 33.50 लाख रुपये की सहायता से 93 बालिकाओं की शिक्षा को फिर से शुरू कराया गया है।

उन्होंने बालिकाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में कठिन परिस्थितियां आती रहती हैं लेकिन घबराने की बजाय उनका साहस एवं संकल्प के साथ सामना करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

परियोजना के तहत लाभान्वित होने वाली बालिका नंदिनी राजपूत ने कहा कि 2018 में उनके पिता का दुर्घटना में निधन हो गया था, जिसके बाद उनकी मां सिलाई-बुनाई कर तीन बहनों के परिवार का भरण-पोषण करती हैं।

उसने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण 11वीं कक्षा की फीस जमा न हो पाने से उनकी शिक्षा बाधित हो रही थी, जिसे जिला प्रशासन के सहयोग से फिर से शुरू किया गया।

एक अन्य बालिका दिव्या ने बताया कि एक सड़क दुर्घटना में दिव्यांग होने के बाद उनके पिता करीब 18 माह तक बिस्तर पर रहे, जिसकी वजह से परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत खराब हो गई थी और उनकी पढ़ाई रुक गयी।

उसने बताया कि देहरादून प्रशासन की मदद से उसकी नौवीं की पढ़ाई फिर से शुरू हुई।

इसी प्रकार आकांशी धीमान और नव्या नैनवाल की पढ़ाई भी ‘नंदा सुनंदा’ पहल के तहत फिर से शुरू हुई।

इनके अतिरिक्त दून विश्वविद्यालय से स्नातक कर रही जीविका अंथवाल ने बताया कि उसके पिता लंबे समय से बीमार हैं और आईसीयू में भर्ती हैं, जिसके कारण उसकी उच्च शिक्षा बाधित हो रही थी।

उसने कहा कि देहरादून जिला प्रशासन के सहयोग से उसे पढ़ाई पूरी करने में मदद मिल रही है।

भाषा दीप्ति जितेंद्र

जितेंद्र


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