नैनीताल, 11 फरवरी (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए 2011 में एक सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले भारतीय सेना के एक जवान के परिवार को दिए गए मुआवजे को बरकरार रखा।
न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकल पीठ ने पिथौरागढ़ मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेश को बरकरार रखते हुए निगम को मृतक के परिवार को ब्याज सहित 28.91 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया।
अदालत ने माना कि यह दुर्घटना बस चालक की लापरवाही के कारण हुई थी क्योंकि निगम की बस ने एक खड़े ट्रक को पीछे से टक्कर मारी थी।
भारतीय सेना की ‘5 गार्ड्स रेजिमेंट’ में नायक गणेश सिंह सात जुलाई 2011 को निगम की बस में उत्तर प्रदेश के बरेली से उत्तराखंड के टनकपुर के लिए यात्रा कर रहे थे।
बरेली-पीलीभीत रोड पर लालोरीखेरा चौराहे के पास, बस चालक ने वाहन पर से नियंत्रण खो दिया और सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से जा टकराई।
घटना में सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
परिवहन निगम ने दावा किया था कि दुर्घटना एक साइकिल सवार को बचाने के प्रयास में हुई और ट्रक गलत जगह पर खड़ा था।
अदालत ने हालांकि इस आधार पर दलील को खारिज कर दिया कि बस चालक को गवाह के रूप में पेश नहीं किया गया और दावे के समर्थन में कोई सबूत भी पेश नहीं किया गया था।
उच्च न्यायालय ने न्यायाधिकरण के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि मुआवजे की राशि उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के अनुरूप है।
अदालत ने निगम को दो महीने के भीतर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित पूरी राशि जमा करने के निर्देश दिए ताकि मृतक सैनिक की विधवा और उसके नाबालिग बच्चों को वित्तीय राहत दी जा सके।
भाषा सं दीप्ति जितेंद्र
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