‘वंदे मातरम्’ केवल गीत नहीं, भारत के पुनर्निर्माण का मंत्र : अमित शाह

‘वंदे मातरम्’ केवल गीत नहीं, भारत के पुनर्निर्माण का मंत्र : अमित शाह

‘वंदे मातरम्’ केवल गीत नहीं, भारत के पुनर्निर्माण का मंत्र : अमित शाह
Modified Date: June 26, 2026 / 04:27 pm IST
Published Date: June 26, 2026 4:27 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा) गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक देशभक्ति गीत नहीं, बल्कि “भारत के पुनर्निर्माण का मंत्र” है। शाह ने मादक पदार्थों के खिलाफ देश की रणनीति पर आयोजित एक बैठक को संबोधित करते हुए बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

शाह ने राष्ट्रीय नार्को-समन्वय केंद्र (एनसीओआरडी) की 10वीं शीर्षस्तरीय बैठक में कहा कि 26 जून देश के मादक पदार्थ विरोधी अभियान के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। उन्होंने कहा कि इस दिन बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती भी है, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान राष्ट्र के आत्मविश्वास को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी।

शाह ने कहा, “बंकिम बाबू ने ‘वंदे मातरम्’ की रचना की थी। ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना और देशभक्ति का एक सशक्त प्रतीक बन गया। जब स्वतंत्रता संग्राम अपने चरम पर था, तब अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष का प्रमुख नारा ‘वंदे मातरम्’ था।”

स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि अनेक क्रांतिकारियों ने ‘वंदे मातरम्’ का उद्घोष करते हुए फांसी के फंदे को चूमा था।

शाह ने कहा, “‘वंदे मातरम्’ हम सभी भारतीयों के लिए केवल एक नारा या गीत नहीं है। ‘वंदे मातरम्’ केवल ऐसा गीत भी नहीं है, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत की थी। ‘वंदे मातरम्’ भारत के पुनर्निर्माण का मंत्र है और विश्व में भारत माता को सर्वोच्च स्थान पर पुनः स्थापित करने का एक माध्यम भी है।”

इस बैठक में 44 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों, राज्य सरकारों तथा स्वापक कानून लागू करने वाली एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने प्रत्यक्ष और ऑनलाइन माध्यम से भाग लिया। बैठक में नशामुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार के प्रयासों को और मजबूत बनाने पर विचार-विमर्श किया गया।

चर्चा का केंद्र सिंथेटिक मादक पदार्थों की बढ़ती चुनौती से निपटना, डार्कनेट के माध्यम से होने वाली तस्करी पर अंकुश लगाना तथा अगले तीन वर्षों में नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों की पहुंच का विस्तार करना रहा।

भाषा अमित दिलीप

दिलीप


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