चुनाव बाद ईवीएम सत्यापन के लिए बहुत कम अनुरोध विपक्ष के पाखंड को उजागर करते हैं: भाजपा

चुनाव बाद ईवीएम सत्यापन के लिए बहुत कम अनुरोध विपक्ष के पाखंड को उजागर करते हैं: भाजपा

चुनाव बाद ईवीएम सत्यापन के लिए बहुत कम अनुरोध विपक्ष के पाखंड को उजागर करते हैं: भाजपा
Modified Date: June 26, 2026 / 08:19 pm IST
Published Date: June 26, 2026 8:19 pm IST

नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा): भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को कहा कि विपक्षी दल अपनी चुनावी हार को सही ठहराने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और निर्वाचन आयोग की ‘आड़’ ले रहे हैं जबकि हाल के विधानसभा चुनावों के बाद ईवीएम की ‘बर्न्ट मेमोरी’ के सत्यापन के लिए बहुत कम आवेदन आये हैं।

हाल के विधानसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल, असम, केरल और पुडुचेरी से ईवीएम की मेमोरी की जांच और सत्यापन के लिए कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ। केवल तमिलनाडु से निर्वाचन आयोग को इस संबंध में केवल चार आवेदन मिले।

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल चुनाव हारने के बाद ही ईवीएम और निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ईवीएम तो केवल एक बहाना है। चुनाव भी केवल एक बहाना है। उनका वास्तविक उद्देश्य स्वयं को बचाना है। यही कारण है कि वे चुनाव आयोग को निशाना बनाते हैं।’’

पूनावाला ने दावा किया, ‘‘वे केवल मतदाताओं के मन में संदेह पैदा करना चाहते हैं और इन आरोपों का इस्तेमाल जवाबदेही से बचने के बहाने के रूप में करते हैं। वास्तव में वे भी जानते हैं कि ईवीएम पूरी तरह सही ढंग से काम कर रही हैं।’’

भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि ईवीएम सत्यापन के लिए प्राप्त आवेदनों के ताजा आंकड़े विपक्ष के ‘पाखंड’ को उजागर करते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘जब वे कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, केरल या तमिलनाडु में चुनाव जीतते हैं, तब ईवीएम पर सवाल नहीं उठाते। जिन राज्यों में हारते हैं, वहीं वे इस तरह के आरोप लगाते हैं। यही उनका पाखंड है।’’

पूनावाला ने दावा किया, ‘‘हाल में पांच विधानसभा चुनावों में चार राज्यों में चुनाव हारने वाले विपक्षी दलों ने ईवीएम की जांच, मेमोरी सत्यापन या परीक्षण के लिए एक भी आवेदन या शिकायत दर्ज नहीं कराई। तमिलनाडु में भी चुनाव आयोग को केवल चार आवेदन मिले। विपक्ष ने अपने व्यवहार से भी यह स्वीकार किया है कि ईवीएम पर उसके आरोपों का कोई आधार नहीं है।’’

उन्होंने कहा,‘‘सार्वजनिक मंचों पर वे ईवीएम, एसआईआर और निर्वाचन आयोग को दोषी ठहराते हैं, लेकिन ये केवल बहाने हैं। चाहे मामला एसआईआर का हो, ईवीएम का हो या चुनाव प्रक्रिया का, वे न तो अदालतों में इन आरोपों को आगे बढ़ाते हैं और न ही कोई ठोस शिकायत दर्ज कराते हैं। वे केवल टेलीविजन कैमरों के सामने ऐसे दावे करते हैं। वास्तव में उनके पास अपने आरोपों के समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं है।’’

भाषा राजकुमार नरेश

नरेश


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