विजयन, सतीशन ने पर्यावरणविद् माधव गाडगिल के निधन पर शोक व्यक्त किया

विजयन, सतीशन ने पर्यावरणविद् माधव गाडगिल के निधन पर शोक व्यक्त किया

विजयन, सतीशन ने पर्यावरणविद् माधव गाडगिल के निधन पर शोक व्यक्त किया
Modified Date: January 8, 2026 / 06:51 pm IST
Published Date: January 8, 2026 6:51 pm IST

तिरुवनंतपुरम, आठ जनवरी (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने बृहस्पतिवार को प्रख्यात पर्यावरणविद माधव गाडगिल के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और पर्यावरण संरक्षण में उनके योगदान को याद किया।

पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, पश्चिमी घाट के संरक्षण में अपने योगदान के लिए मशहूर गाडगिल का संक्षिप्त बीमारी के बाद बुधवार को पुणे में निधन हो गया। वह 83 वर्ष के थे।

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में विजयन ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि पर्यावरणीय मुद्दों पर गाडगिल के विचारों ने राज्य में पर्यावरण संरक्षण की सोच को गहराई से प्रभावित किया है

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मुख्यमंत्री ने कहा, ‘अपनी शिक्षाओं और शोध के माध्यम से गाडगिल ने पर्यावरण संरक्षण पर होने वाली चर्चाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया।’

सतीशन ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि गाडगिल ने अपना जीवन पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति अध्ययन के लिए समर्पित कर दिया था, जिसके लिए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

विपक्ष के नेता ने अपने कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा, ‘उनके दर्शन के मुख्य बिंदु मानव केंद्रित पर्यावरण संरक्षण और प्रबंधन, संतुलित विकास और विकेंद्रीकृत शासन थे। उन्होंने निरंतर इस बात पर जोर दिया कि देश की प्राकृतिक संपदा को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जाना चाहिए। उन्होंने आलोचनाओं का सामना धैर्य और वैज्ञानिक जागरूकता के साथ किया।’

गाडगिल बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएससी) में पारिस्थितिक विज्ञान केंद्र के संस्थापक और पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ समिति (डब्ल्यूजीईईपी) के अध्यक्ष थे, जिसे गाडगिल आयोग के नाम से जाना जाता है।

गाडगिल ने भारत के पारिस्थितिक रूप से नाजुक पश्चिमी घाटों पर जनसंख्या दबाव, जलवायु परिवर्तन और विकास गतिविधियों के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए सरकार द्वारा गठित समिति की अध्यक्षता की थी।

गाडगिल ने एक ऐतिहासिक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें उन्होंने सिफारिश की थी कि पश्चिमी घाट के एक बड़े हिस्से को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील घोषित किया जाए।

भाषा प्रचेता सुरेश

सुरेश


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