ज्ञान, नवाचार और संस्कार के समन्वय से ही ‘विकसित भारत 2047’ का निर्माण संभव: देवनानी

ज्ञान, नवाचार और संस्कार के समन्वय से ही ‘विकसित भारत 2047’ का निर्माण संभव: देवनानी

ज्ञान, नवाचार और संस्कार के समन्वय से ही ‘विकसित भारत 2047’ का निर्माण संभव: देवनानी
Modified Date: February 26, 2026 / 03:37 pm IST
Published Date: February 26, 2026 3:37 pm IST

जयपुर, 26 फरवरी (भाषा) राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने जयपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ज्ञान, नवाचार और संस्कार के समन्वय से ही ‘विकसित भारत 2047’ का निर्माण संभव है।

देवनानी जयपुर स्थित मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में बृहस्पतिवार को राजस्थान विज्ञान महोत्सव के उद्घाटन कार्यक्रम में बोल रहे थे।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर शुरू इस तीन दिवसीय महोत्सव के उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष देवनानी थे।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, राजस्थान सरकार, विज्ञान भारती राजस्थान तथा मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, उद्योग प्रतिनिधियों तथा नवाचार से जुड़े युवाओं की सहभागिता रही।

देवनानी ने कार्यक्रम की विषयवस्तु ‘विज्ञान में महिलाएं, विकसित भारत के लिए प्रेरक शक्ति’ पर विचार व्यक्त करते हुए कहा, ”भारतीय सनातन परम्परा में नारी को सृजन और ज्ञान की मूल शक्ति माना गया है।”

उन्होंने प्राचीन विदुषियों जैसे गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे वेदों के समय से ही महिलाएं वैज्ञानिक दृष्टिकोण की वाहक रही हैं।

आधुनिक भारत में महिला वैज्ञानिकों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए देवनानी ने कहा, ”अंतरिक्ष अनुसंधान, रक्षा प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक नवाचार के क्षेत्र में भारतीय बेटियों ने वैश्विक स्तर पर उत्कृष्टता स्थापित की है। अवसर और संसाधन मिलने पर वे देश की वैज्ञानिक क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही हैं।”

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह समाज के समग्र विकास, नवाचार और मानवीय मूल्यों से जुड़ा जीवन दृष्टिकोण है।

उन्होंने कहा, ”जब तक विज्ञान को संस्कार और मानवता से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक वास्तविक प्रगति संभव नहीं है।”

विधानसभा अध्यक्ष ने आह्वान किया कि विज्ञान का असली मकसद ‘मानव कल्याण’ और ‘सामाजिक उत्थान’ होना चाहिए।

देवनानी ने कहा कि राज्य की युवा प्रतिभाएं अभियांत्रिकी, चिकित्सा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अनुसंधान और उद्यमिता के क्षेत्र में नई पहचान बना रही हैं। विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में जिज्ञासा आधारित विज्ञान शिक्षा को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए तथा विशेष रूप से बेटियों को विज्ञान और अनुसंधान में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना आवश्यक है।

इस मौके पर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने हर विद्यालय में विज्ञान क्लब की स्थापना, ग्रामीण डिजिटल सशक्तीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और बहुभाषी तकनीकी उपयोग पर जोर दिया।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के शासन सचिव वी. सरवन कुमार ने विज्ञान को विद्यार्थियों के लिए सरल और सुलभ बनाने की राज्य स्तरीय पहलों की जानकारी दी।

विज्ञान भारती के सचिव डॉ. मेघेंद्र शर्मा ने वैज्ञानिक सी.वी. रमन की स्मृति का उल्लेख करते हुए छात्र-वैज्ञानिक संवाद और महिला स्टार्टअप नेतृत्व को महत्वपूर्ण बताया।

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के पूर्व सचिव पद्मश्री प्रो. आशुतोष शर्मा ने विज्ञान और तकनीक को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए सतत विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका रेखांकित की।

मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक प्रो. एन.पी. पाढ़ी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

भाषा बाकोलिया मनीषा संतोष

संतोष


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