CG HC On No Work No Pay Rule: ‘नो वर्क, नो पे…’ हर मामले में लागू नहीं, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का चौंकाने वाला फैसला, राज्य सरकार को दिए यह निर्देश, पढ़िए

CG HC On No Work No Pay Rule: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नो वर्क, नो पे का सिद्धांत हर मामले में स्वतः लागू नहीं होता।

CG HC On No Work No Pay Rule: ‘नो वर्क, नो पे…’ हर मामले में लागू नहीं, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का चौंकाने वाला फैसला, राज्य सरकार को दिए यह निर्देश, पढ़िए

CG HC On No Work No Pay Rule/Photo Credit: AI

Modified Date: June 13, 2026 / 12:33 pm IST
Published Date: June 13, 2026 12:03 pm IST
HIGHLIGHTS
  • हाईकोर्ट ने कहा कि 'नो वर्क, नो पे' का सिद्धांत हर मामले में स्वतः लागू नहीं होता
  • विभागीय लापरवाही से पदोन्नति नहीं मिलने पर कर्मचारी को वेतन लाभ से पूरी तरह वंचित नहीं किया जा सकता
  • कोर्ट ने राज्य सरकार को 50% एरियर्स चार माह के भीतर देने का निर्देश दिया

बिलासपुर। CG HC On No Work No Pay Rule: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि नो वर्क, नो पे (काम नहीं तो वेतन नहीं) का सिद्धांत हर मामले में स्वतः लागू नहीं होता। यदि किसी कर्मचारी को विभागीय लापरवाही या प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण पदोन्नति का लाभ समय पर नहीं मिल पाता, तो उसे पूरी तरह वेतन लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
कोर्ट (CG HC On No Work No Pay Rule) ने यह फैसला सेवानिवृत्त सहायक आयुक्त जीआर. साहू द्वारा दायर याचिका पर सुनाया। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि, वरिष्ठ होने के बावजूद उन्हें समय पर डिप्टी कमिश्नर पद पर पदोन्नति नहीं दी गई, जबकि उनके जूनियर अधिकारियों को वर्ष 2011 में ही पदोन्नत कर दिया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि विभागीय समीक्षा पदोन्नति समिति (रिव्यू डीपीसी) ने याचिकाकर्ता को प्रमोशन के लिए उपयुक्त पाया था और उन्हें उनके जूनियर अधिकारियों से ऊपर रखने की अनुशंसा भी की थी। इसके बावजूद विभाग ने लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की। याचिकाकर्ता ने कई बार प्रतिवेदन दिए और न्यायालय की शरण भी ली, लेकिन समय पर पदोन्नति नहीं मिल सकी।

 सरकार ने “नो वर्क, नो पे” सिद्धांत का दिया तर्क 

CG HC On No Work No Pay Rule हाईकोर्ट ने पाया कि विभाग की गलती मामले में मुख्य विवाद यह था कि 13 जुलाई 2011 से 31 दिसंबर 2016 (सेवानिवृत्ति तिथि) तक की अवधि के लिए याचिकाकर्ता को पदोन्नत पद का वेतन लाभ दिया जाए या नहीं। राज्य सरकार ने “नो वर्क, नो पे” का सिद्धांत लागू करने का तर्क दिया, जबकि याचिकाकर्ता का कहना था कि उन्हें विभाग की गलती के कारण पदोन्नत पद पर कार्य करने का अवसर ही नहीं मिला।

HC का राज्य सरकार को निर्देश 

 CG HC On No Work No Pay Rule न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता पदोन्नत पद पर कार्य नहीं कर पाए, लेकिन इसके वे स्वयं जिम्मेदार नहीं थे। विभागीय निष्क्रियता के कारण उन्हें पदोन्नति से वंचित रखा गया। ऐसे मामलों में नो वर्क, नो पे का सिद्धांत यांत्रिक रूप से लागू नहीं किया जा सकता। हालांकि न्यायालय ने यह भी माना कि, याचिकाकर्ता ने वास्तव में डिप्टी कमिश्नर के पद पर कार्य नहीं किया था। इसलिए न्यायसंगत संतुलन बनाते हुए अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह 13 जुलाई 2011 से 31 दिसंबर 2016 तक डिप्टी कमिश्नर और सहायक आयुक्त के वेतन के अंतर की राशि का 50 प्रतिशत एरियर्स चार माह के भीतर दे। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।

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सवाल आपका है... 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई मीडिया संस्थानों में अपना योगदान दिया है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर की डिग्री ली है.