राजनाथ सिंह की मौजूदगी में युद्धपोत तारागिरी नौसेना के बेड़े में शामिल
राजनाथ सिंह की मौजूदगी में युद्धपोत तारागिरी नौसेना के बेड़े में शामिल
(तस्वीरों के साथ)
विशाखापत्तनम, तीन अप्रैल (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि ऊर्जा आपूर्ति समेत देश का 95 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्ग से होता है और ऐसे में उभरते समुद्री खतरों के बीच वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा में भारतीय नौसेना की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यहां आईएनएस तारागिरी को औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना में शामिल करने के लिए आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय नौसेना हिंद महासागर में लगातार अपनी उपस्थिति बनाए रखती है, चाहे वह फारस की खाड़ी हो या मलक्का जलसंधि।
उन्होंने कहा कि आईएनएस तारागिरी के शामिल होने से नौसेना की शक्ति, मूल्यों और प्रतिबद्धता में वृद्धि होगी।
‘प्रोजेक्ट 17ए’ के तहत निर्मित आईएनएस तारागिरी चौथा पोत है जिसका वजन 6,670 टन है। इसे मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई द्वारा बनाया गया है, जो उन्नत डिजाइन और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता को प्रदर्शित करता है। यह अन्य हथियारों के साथ-साथ ब्रह्मोस मिसाइलें से भी लैस है।
इस युद्धपोत की बनावट अधिक पतली है, जिससे इसका रडार पर दिखाई देने वाला आकार बहुत कम हो जाता है और यह जटिल समुद्री परिस्थितियों में अधिक सुरक्षित रहने में सक्षम है।
सिंह ने संकट के समय में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए नौसेना की सराहना की।
उन्होंने कहा, ‘‘जब भी कोई संकट आता है, चाहे वह निकासी अभियान हो या मानवीय सहायता प्रदान करना, हमारी नौसेना हमेशा सबसे आगे रहती है। मुझे लगता है कि हमारी नौसेना भारत के मूल्यों और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। मेरा मानना है कि आईएनएस तारागिरी के शामिल होने से हमारी नौसेना की शक्ति, मूल्य और प्रतिबद्धता में वृद्धि होगी।’’
रक्षा मंत्री ने कहा कि देश के लिए एक मजबूत और सक्षम नौसेना कोई विकल्प नहीं बल्कि एक आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘समुद्र में कई संवेदनशील स्थान हैं जहां हमारी नौसेना ने माल की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार सक्रिय उपस्थिति बनाए रखी है। जब भी वहां तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई है, भारतीय नौसेना ने हमारे वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित की है।’’
सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना ने यह साबित कर दिया है कि वह न केवल देश के हितों की रक्षा करने में सक्षम है, बल्कि जरूरत पड़ने पर अपने नागरिकों और दुनिया भर के व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा सकती है।
उन्होंने कहा कि यह क्षमता भारत को एक जिम्मेदार समुद्री शक्ति बनाती है।
इतिहास का हवाला देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि नौसैनिक शक्ति को मजबूत किए बिना कोई भी देश सही मायनों में शक्तिशाली नहीं बन सकता इसलिए जब नरेंद्र मोदी 2047 तक ‘विकसित भारत’ की बात करते हैं, तो उसमें समुद्री शक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
सिंह ने देश में ही निर्मित तारागिरी को भारतीय नौसेना में शामिल करने को ‘एक बड़ी उपलब्धि’ बताया।
उन्होंने कहा कि यह जहाज तेज गति से चलने में सक्षम है और लंबे समय तक समुद्र में तैनात रह सकता है। यह दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने, अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और जरूरत पड़ने पर तत्काल जवाबी कार्रवाई करने के लिए डिज़ाइन की गई प्रणालियों से लैस है।
सिंह ने कहा कि इसमें आधुनिक रडार, सोनार और मिसाइल प्रणालियां जैसे ब्रह्मोस और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें लगी हैं, जो इसकी परिचालन क्षमता को और बढ़ाती हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘उच्च तीव्रता वाले युद्ध से लेकर समुद्री सुरक्षा, समुद्री डकैती रोधी अभियान, तटीय निगरानी और मानवीय मिशन तक, यह हर भूमिका में पूरी तरह से सक्षम है, जो इसे नौसेना का एक अद्वितीय पोत बनाता है।’’
यह पोत 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित है और भारत के घरेलू रक्षा तंत्र की परिपक्वता को दर्शाता है, जिसमें 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) शामिल हैं और हजारों लोगों को रोजगार मिलता है।
तारागिरी में संयुक्त डीजल या गैस प्रणोदन प्रणाली लगी है, जो इसे उच्च गति और लंबी दूरी तक संचालन की क्षमता प्रदान करती है।
नौसेना ने बताया कि यह युद्धपोत अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस है, जिनमें सतह से सतह पर मार करने वाली सुपरसोनिक मिसाइलें, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और विशेष पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली शामिल हैं। इन सभी को आधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से जोड़ा गया है, जिससे उभरते खतरों का तेजी और सटीकता से सामना किया जा सकता है।
युद्धक भूमिका के अलावा तारागिरी को मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों के लिए भी डिजाइन किया गया है, जिससे शांति और संघर्ष दोनों स्थितियों में इसकी उपयोगिता बढ़ जाती है।
सिंह ने समुद्र के नीचे से गुजरने वाले इंटरनेट केबल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वित्तीय लेनदेन, संचार नेटवर्क और रक्षा समन्वय इस पर निर्भर करते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि कोई इन केबल को नुकसान पहुंचाता है तो इसका प्रभाव किसी एक देश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यवस्था पर पड़ेगा।
सिंह ने कहा, ‘‘इसीलिए, समुद्री सुरक्षा को पारंपरिक दृष्टिकोण से परे एक व्यापक और भविष्य के लिए तैयार ढांचे के रूप में देखा जाना चाहिए।’’
रक्षामंत्री ने कहा, ‘‘हमें केवल अपने तटों की सुरक्षा तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, यातायात मार्गों और डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए जो हमारे राष्ट्रीय हितों से जुड़े हैं। मुझे खुशी है कि भारतीय नौसेना इन सभी सुरक्षा कार्यों में सक्रिय रूप से लगी हुई है।’’
उन्होंने बताया कि सुरक्षा के प्रति यह दृष्टिकोण देश को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगा और भारत को एक शक्तिशाली समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करेगा।
सिंह ने कहा कि जब भारत आईएनएस तारागिरी जैसे उन्नत जहाजों का निर्माण और तैनाती करता है, तो यह पूरे क्षेत्र के लिए शांति और समृद्धि की गारंटी बन जाता है।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश

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