‘हम जेन जी हैं…’ वाले वीडियो से नाराज पूर्व सैनिक लद्दाख में सुरक्षा कर्मियों के समर्थन में आए

Ads

‘हम जेन जी हैं...’ वाले वीडियो से नाराज पूर्व सैनिक लद्दाख में सुरक्षा कर्मियों के समर्थन में आए

  •  
  • Publish Date - August 21, 2026 / 12:01 AM IST,
    Updated On - August 21, 2026 / 12:01 AM IST

नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) लद्दाख में एक जांच चौकी पर वाहनों की आवाजाही रोके जाने से आक्रोशित एक महिला का सुरक्षाकर्मियों के साथ किये गए आक्रामक व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद कई भूतपूर्व सैनिकों ने महिला की आलोचना की है।

कुछ भूतपूर्व सैनिकों का कहना है कि ‘‘हमारे सैनिकों को गलत तरीके से दोषी ठहराना या उनका अनादर करना गलत है’’, जबकि कई अन्य ने इलाके में ‘‘सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशीलताओं’’को रेखांकित किया है।

इंटरनेट पर बड़े पैमाने पर साझा किये गए इस बिना तारीख वाले वीडियो की कई वर्गों ने आलोचना की है।

सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित वीडियो में दिखाई दे रहा है कि कई पर्यटकों से घिरी एक महिला लद्दाख में एक जांच चौकी पर गाड़ियों की आवाजाही रोके जाने की शिकायत कर रही है, जबकि अवरोध के दूसरी तरफ सुरक्षाकर्मी पहरा दे रहे हैं।

वीडियो में दिखाई दे रहा है कि महिला हाथ में फोन लेकर घटना को रिकॉर्ड कर रही है और उसे यह कहते हुए सुना जा सकता है, ‘‘हम जेन-जी हैं… हम यह बकवास बर्दाश्त नहीं करेंगे।’’

महिला को यह कहते हुए भी सुना जा सकता है, ‘‘क्या पर्यटक यही देखने आते हैं?’’ तत्काल यह जानकारी नहीं मिली है कि पूरा प्रकरण क्या था या किस वजह से वह आक्रोशित थी।

हालांकि, इस वायरल वीडियो की सेना के कई पूर्व अधिकारियों ने कड़ी आलोचना की है और लद्दाख (जो पहले अविभाजित जम्मू-कश्मीर का हिस्सा था) जैसी जगहों पर सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशीलताओं की ओर भी ध्यान दिलाया है।

मिजोरम के राज्यपाल और पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल (सेवानिवृत्त) वी.के. सिंह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भारतीय सेना हमारे देश और उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वालों के बीच ढाल बनकर खड़ी है। मिनामार्ग की घटना हमारे सैनिकों के साहस, बलिदान और सतर्कता की एक बड़ी मिसाल है। हालात चाहे जो भी हों, हमारे सैनिकों पर गलत आरोप लगाना या उनका अनादर करना गलत है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आलोचना तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, न कि भावनाओं या बिना सोचे-समझे लगाए गए आरोपों पर। हम उन लोगों के साथ खड़े हैं जो भारत के लिए सेवा और त्याग करते हैं।’’

आतंकवाद रोधी मामलों के विशेषज्ञ और कश्मीर में 15वीं कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) की जिम्मेदारी निभा चुके सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने वीडियो का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘लद्दाख में, जहां यातायात को नियंत्रित किया जा रहा था, एक महिला पर्यटक ने कहा कि ‘सेना की तनख्वाह हमारे कर के पैसे से दी जाती है।’ मुझे अधिक जानकारी तो नहीं है, लेकिन यह टिप्पणी सैनिकों के बलिदान का अपमान है।’’

इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए जनरल दुआ ने कहा, ‘‘सेना के जवान भी टैक्स देते हैं। सीमावर्ती इलाका होने के कारण लद्दाख में सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील स्थितियां हैं।’’

लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) केजेएस ढिल्लों ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में इस घटना पर प्रतिक्रिया दी और इलाके में तैनात सैनिकों का समर्थन किया।

उन्होंने कहा, ‘‘महोदया, सैनिक अपनी तनख्वाह मिलने से पहले ही कर चुका देते हैं। आप ऐसी जगहों पर छुट्टियां मनाने जा सकती हैं क्योंकि हमारे सैनिक अपनी जान की बाजी लगाकर दिन-रात वहां पहरा देते हैं। आपकी भाषा आपकी अच्छी परवरिश और शिक्षा को इंगित करती है। हमेशा सम्मान से पेश आएं। अपने अधिकारों की मांग करने से पहले कानून का पालन करने वाला अच्छा नागरिक बनना सीखें। और आखिर में… जल्द ठीक हों ।’’

भाषा धीरज वैभव

वैभव