पश्चिम बंगाल : चिकित्सा शिक्षा पदोन्नति पैनल रद्द, चयन प्रक्रिया फिर से शुरू होगी
पश्चिम बंगाल : चिकित्सा शिक्षा पदोन्नति पैनल रद्द, चयन प्रक्रिया फिर से शुरू होगी
कोलकाता, 11 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल सरकार ने चिकित्सा शिक्षा सेवा में संकाय पदों पर जारी पदोन्नति प्रक्रिया को रद्द कर दिया है और नए सिरे से आवेदन एवं साक्षात्कार प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए हैं। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में सहायक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर पदों पर नियुक्तियों के लिए मार्च में हुए साक्षात्कार के आधार पर तैयार किए गए पदोन्नति पैनल को रद्द कर दिया है। यह जानकारी बुधवार को जारी अधिसूचना में दी गई।
यह कदम राज्य में चिकित्सा शिक्षा ढांचे की समीक्षा के तहत उठाया गया है, जिसमें पहले की प्रक्रियाओं पर पुनर्विचार किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आधिकारिक रिक्ति आंकड़ों के अनुसार, राज्य की मेडिकल शिक्षा प्रणाली में प्रोफेसर के 226, एसोसिएट प्रोफेसर के 471 और सहायक प्रोफेसर के 328 पद खाली हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, इन पदों पर पदोन्नति के लिए मार्च में ही साक्षात्कार आयोजित किए गए थे, जिनमें विभिन्न चिकित्सा विषयों के उम्मीदवारों ने भाग लिया था और उसी आधार पर एक पैनल भी तैयार किया गया था।
नयी अधिसूचना के अनुसार, पूरी प्रक्रिया को नए सिरे से शुरू किया जाएगा। इसके तहत पात्र उम्मीदवारों को फिर से आवेदन करना होगा और नए साक्षात्कार में शामिल होना होगा।
नए कार्यक्रम के तहत ऑनलाइन आवेदन 15 जून से 30 जून तक स्वीकार किए जाएंगे। पहले से आवेदन कर चुके उम्मीदवारों को भी फिर से आवेदन करना होगा। नए साक्षात्कार की तारीखें बाद में घोषित की जाएंगी।
सरकार ने पुराने पैनल को रद्द करने के कारणों पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है।
एक सरकारी मेडिकल कॉलेज से जुड़े वरिष्ठ डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि यह निर्णय आश्चर्यजनक है, क्योंकि साक्षात्कार प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी थी और कई उम्मीदवार आदेशों का इंतजार कर रहे थे।
एक अन्य संकाय सदस्य ने कहा कि इस कदम से चिकित्सा शिक्षकों में अनिश्चितता का माहौल बन गया है, क्योंकि पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू करनी पड़ रही है और पुराने पैनल को रद्द करने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इस फैसले के कारणों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
भाषा
मनीषा वैभव
वैभव

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