अतिक्रमणकारियों को हिरासत में लिया तो स्थानीय लोगों ने वन कार्यालय में तोड़फोड़ की
अतिक्रमणकारियों को हिरासत में लिया तो स्थानीय लोगों ने वन कार्यालय में तोड़फोड़ की
गुवाहाटी, 17 अप्रैल (भाषा) असम के चिरांग जिले में आरक्षित वन भूमि पर कथित अतिक्रमण को लेकर कुछ स्थानीय लोगों को हिरासत में लिए जाने के बाद भीड़ ने रुनीखाटा रेंज कार्यालय में तोड़फोड़ की। इस घटना में एक वनकर्मी घायल हो गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
खबरों के मुताबिक, भीड़ ने वन क्षेत्र कार्यालय में तोड़फोड़ की और भूटान सीमा के करीब स्थित परिसर के अंदर सरकारी वाहनों को आग लगा दी।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए तुरंत मौके पर पहुंचे क्योंकि स्थानीय लोगों ने वन कार्यालय का फर्नीचर जलाकर और पत्थर रखकर सड़क को अवरुद्ध करने का प्रयास किया।
वन विभाग के एक कर्मचारी ने पत्रकारों को बताया कि इस हिंसा में उनके कुछ सहकर्मी घायल हो गए।
उन्होंने कहा, ‘भीड़ ने वन कार्यालय और आवासीय क्वार्टरों में तोड़फोड़ की और परिसर में खड़ी गाड़ियों को आग लगा दी।’
एक अधिकारी ने बताया कि बृहस्पतिवार को वन कर्मियों द्वारा कुछ स्थानीय लोगों को रिपु-चिरांग आरक्षित वन में कथित तौर पर अवैध कटाई और वन भूमि की सफाई के आरोप में हिरासत में लेने के बाद तनाव उत्पन्न हो गया था। यह आरक्षित वन चिरांग जिले में भारत-भूटान सीमा पर स्थित सिखना ज्वह्वलाओ राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आता है।
बृहस्पतिवार रात को भीड़ ने हिरासत में लिए गए व्यक्तियों की बिना शर्त रिहाई की मांग करते हुए वन कार्यालय का घेराव किया था लेकिन वह बिना हिंसा के तितर-बितर हो गई।
लेकिन शुक्रवार की सुबह लाठी- डंडों से लैस भीड़ इकट्ठा हो गई और उसने जमकर उत्पात मचाया। उनका आरोप था कि वन विभाग के कर्मचारियों ने पिछले दिन उन पर हमला किया था जिसमें दो महिला प्रदर्शनकारी घायल हो गईं थीं।
स्थानीय लोगों ने कथित हमले में शामिल वन कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और नारे लगाए जबकि स्थानीय पुलिस और नागरिक प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में लाने का प्रयास किया।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने प्रदर्शनकारियों से वन कर्मियों के खिलाफ अपने आरोपों को प्रशासन को सौंपने का आग्रह किया।
उनसे इलाका खाली करने का अनुरोध करते हुए उन्होंने कहा, ‘स्थानीय प्रशासन को आपके आरोपों की जांच करने के लिए समय दें। सड़क अवरुद्ध करना और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना कोई समाधान नहीं है।’
भाषा तान्या नरेश
नरेश

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