पायलटों के लिए साप्ताहिक आराम और छुट्टियों के नियमों में अनिश्चितकालीन छूट क्यों दी गई: अदालत

पायलटों के लिए साप्ताहिक आराम और छुट्टियों के नियमों में अनिश्चितकालीन छूट क्यों दी गई: अदालत

पायलटों के लिए साप्ताहिक आराम और छुट्टियों के नियमों में अनिश्चितकालीन छूट क्यों दी गई: अदालत
Modified Date: January 30, 2026 / 03:53 pm IST
Published Date: January 30, 2026 3:53 pm IST

नयी दिल्ली, 30 जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने डीजीसीए से पायलटों के लिए साप्ताहिक आराम और छुट्टियों से संबंधित नए मानदंडों के कार्यान्वयन के संबंध में विमानन कंपनियों को दी गई ‘‘अनिश्चितकालीन’’ छूट पर शुक्रवार को सवाल उठाया।

इस मुद्दे पर दायर जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने डीजीसीए को नोटिस जारी किया। पीठ ने विमानन क्षेत्र के नियामक से उस नए उड़ान-ड्यूटी नियम को तुरंत वापस लेने के अपने निर्णय के पीछे के ‘तर्क’ को स्पष्ट करने के लिए कहा, जिसमें कहा गया था कि ‘‘किसी भी छुट्टी को साप्ताहिक अवकाश से प्रतिस्थापित नहीं किया जाएगा।’

पीठ ने नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) और इंडिगो दोनों को दो सप्ताह के भीतर जनहित याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा।

पांच दिसंबर, 2025 को डीजीसीए ने उड़ान ड्यूटी समय सीमा (एफडीटीएल) में छूट लागू की ताकि इंडिगो अधिक पायलटों को ड्यूटी पर तैनात कर सके और व्यवधानों को कम करके परिचालन को सामान्य कर सके।

इंडिगो ने पिछले साल दिसंबर के पहले सप्ताह में देश भर में सैकड़ों उड़ानें रद्द कर दीं क्योंकि एयरलाइन पायलटों के लिए नए उड़ान-ड्यूटी मानदंडों को लागू करने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं थी।

डीजीसीए की वकील ने शुक्रवार को कहा कि नियामक एक नवंबर, 2025 को एफडीटीएल के लागू होने के बाद से स्थिति पर नजर रख रहा है और ऑडिट के साथ-साथ पायलटों द्वारा दो प्रकार की छुट्टियों को एक साथ मिलाने के संबंध में एयरलाइंस के अभ्यावेदनों के मद्देनजर इसे वापस लेने का निर्णय लिया गया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पांच दिसंबर के फैसले के बाद भी पायलटों के लिए साप्ताहिक आराम अनिवार्य बना हुआ है और यह नागर विमानन नियमों द्वारा नियंत्रित होता है, हालांकि छुट्टियां पायलट और एयरलाइन के बीच अनुबंध का मामला हैं।

डीजीसीए की वकील ने यह भी कहा कि पांच दिसंबर को जारी एक अन्य पत्र के माध्यम से इंडिगो को 10 फरवरी तक रात्रि ड्यूटी के मानदंडों से विशेष छूट दी गई थी।

हालांकि, अदालत ने पूछा कि जब इंडिगो को रात्रि ड्यूटी के मानदंडों में अस्थायी छूट दी गई थी, तो साप्ताहिक आराम और छुट्टियों के गैर-प्रतिस्थापन के नियम को बिना किसी समय सीमा के क्यों वापस ले लिया गया।

अदालत ने कहा, “शिकायत यह प्रतीत होती है कि छुट्टी और साप्ताहिक अवकाश को आपस में नहीं मिलाया जा सकता, जिसे आपने एक विशेष एयरलाइन में व्यवधान के कारण वापस ले लिया है। यदि आप एक ही दिन दो पत्र जारी कर रहे हैं – एक 10 फरवरी तक के लिए है, लेकिन पहला अनिश्चित काल के लिए है।’’

पीठ ने कहा, ‘‘यदि पहले पत्र का आपका जवाब व्यवधान के संबंध में था और दूसरा पत्र भी व्यवधान के कारण ही था, लेकिन आपने (रात की ड्यूटी के लिए) समय सीमा 10 फरवरी तक सीमित कर दी है, तो दूसरे पत्र के लिए ऐसा क्यों नहीं किया?’’

अदालत ने डीजीसीए के वकील से पूछा, ‘इसे वापस लेने का क्या औचित्य है? और यह सभी विमानन कंपनियों पर लागू होता है?’

पिछली सुनवाई में अदालत ने कहा था कि पायलटों की थकान को रोकने के लिए डीजीसीए नियमों को लागू न करने के कारण सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर उत्पन्न चिंताओं को ‘नज़रअंदाज़’ नहीं किया जा सकता है।

याचिकाकर्ताओं, सबरी रॉय लेंका, अमन मोंगा और किरण सिंह ने आरोप लगाया है कि थकान संबंधी नियमों में छूट डीजीसीए द्वारा केवल इंडिगो को अवैध रूप से दी गई थी और यह प्रथम दृष्टया दुर्भावनापूर्ण थी।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (आईसीएओ) के तहत डीजीसीए को थकान संबंधी नियमों और अन्य प्रावधानों को समान रूप से लागू करने की जरूरत है, लेकिन वह लगातार इस तरह की व्यवस्था को लागू करने में विफल रहा है।

मामले में अगली सुनवाई अप्रैल में होगी।

भाषा आशीष नरेश

नरेश


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